द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) स्वरूप · गोदावरी उद्गम
सह्याद्रिशीर्षे विमले वसन्तं गोदावरीतीरपवित्रदेशे। यद्धर्शनात् पातकमाशु नाशं प्रयाति तं त्र्यम्बकमीशमीडे॥
भावार्थ: सह्याद्रि पर्वत के पावन शिखर पर और गोदावरी नदी के तट पर जो विराजमान हैं, जिनके दर्शन मात्र से समस्त पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं, उन देवाधिदेव त्र्यंबकेश्वर की मैं स्तुति करता हूँ।
महर्षि गौतम और उनकी पत्नी अहिल्या यहाँ निवास करते थे। एक बार अकाल के समय ऋषि गौतम ने अपनी तपस्या से जल उत्पन्न किया। अन्य ईर्ष्यालु ऋषियों ने एक मायावी गाय भेजी जो गौतम ऋषि के स्पर्श मात्र से मर गई। गोहत्या के पाप से मुक्ति पाने हेतु ऋषि गौतम ने शिव की कठोर आराधना की। शिवजी ने प्रसन्न होकर गंगा जी को ब्रह्मगिरि पर प्रवाहित होने का आदेश दिया, जो गोदावरी कहलाईं, और त्रिदेवों ने यहाँ ज्योतिर्लिंग रूप धारण किया।
गोदावरी नदी को दक्षिण भारत की गंगा कहा जाता है जिसका उद्गम त्र्यंबकेश्वर स्थित ब्रह्मगिरि पर्वत से हुआ। यहाँ हर 12 वर्ष में नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला आयोजित होता है। मंदिर की चारदीवारी काले बेसाल्ट पत्थरों से निर्मित है और परिसर में "कुशावर्त तीर्थ" स्थित है जहाँ से गोदावरी नदी धरातल पर प्रकट होती है।
मंदिर पूर्णतः काले पत्थरों से निर्मित है। ज्योतिर्लिंग एक गहरे अरघे (गड्ढे) में स्थित है जिसमें जल अनवरत बहता रहता है। शिवलिंग पर हीरे और पन्ना जड़ा हुआ स्वर्ण का मुकुट (नासो मुकुट) चढ़ाया जाता है जो पांडवों के काल का माना जाता है और इसे प्रत्येक सोमवार को 4 से 5 बजे के बीच दर्शनार्थियों के लिए प्रदर्शित किया जाता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| काकड़ आरती | प्रातः 05:30 - 06:00 | प्रातःकालीन नित्य जागरण |
| मध्याह्न महापूजा | दोपहर 01:00 - 01:30 | राजभोग अर्पण |
| संध्या आरती | सायं 07:00 - 08:00 | दीपों से महाआरती |
गर्भगृह स्पर्श पूजा हेतु: केवल सोला (रेशमी या सूती बिना सिला पीला/सफेद वस्त्र) एवं धोती। सामान्य दर्शन: शालीन कुर्ता-पायजामा।
केवल भारतीय पारंपरिक साड़ी। गर्भगृह में सलवार-कमीज या पश्चिमी परिधान वर्जित।
💡 कालसर्प व त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा हेतु अधिकृत पुरोहितों से पहले ही संपर्क करें।
करोड़ों साधु-संतों का कुशावर्त कुंड में शाही स्नान
अखंड जलाभिषेक और पंचकोशी परिक्रमा
दीपदान और त्र्यंबकेश्वर नगर में रथोत्सव
मुंबई या पुणे एयरपोर्ट से कैब द्वारा 3.5 घंटे में नासिक होते हुए त्र्यंबकेश्वर पहुँच सकते हैं।
नासिक रोड रेलवे स्टेशन से हर 15 मिनट पर त्र्यंबकेश्वर के लिए बसें और टैक्सियां उपलब्ध हैं (45 मिनट का सफर)।
मुंबई-नासिक हाईवे (NH-160) और पुणे-नासिक मार्ग से शानदार 4-लेन कनेक्टिविटी।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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