
“नए वाहन की सुरक्षा, सुख-समृद्धि एवं दुर्घटनाओं से रक्षा हेतु सम्पूर्ण वैदिक विधि”
सनातन परम्परा में वाहन को केवल एक भौतिक साधन नहीं, बल्कि जीवन की यात्रा में एक सहायक साथी माना गया है। महाभारत में अर्जुन के रथ पर स्वयं हनुमान जी ध्वज रूप में रक्षा कर रहे थे। वैदिक मंत्रोच्चार और सिंदूर-स्वास्तिक से वाहन को अभिमंत्रित करने से नकारात्मक ऊर्जा और मार्ग के अमंगल दोष नष्ट होते हैं।
आज की युवा पीढ़ी जो नई कार या बाइक खरीदती है, उसके लिए यह विधि वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से सुरक्षा का भाव जाग्रत करती है। बड़े-बुजुर्गों को मानसिक संतोष मिलता है कि उनके बच्चों का वाहन ईश्वर की छत्रछाया में सुरक्षित है।
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घर पर स्वयं करने हेतु सरल एवं प्रमाणिक विधि
अपने हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें और हाथ धो लें। इसके पश्चात आम के पत्ते या दूर्वा से गंगाजल लेकर वाहन के ऊपर, अंदर और चारों ओर छिड़कें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
सरल अर्थ: जो भी व्यक्ति भगवान पुण्डरीकाक्ष का स्मरण करता है, वह बाहर और भीतर दोनों से पवित्र हो जाता है।
चमेली के तेल या घी में सिंदूर व रोली घोलकर दाहिने हाथ की अनामिका (ring finger) से वाहन के बोनट पर बड़ा शुभ स्वास्तिक बनाएं। चारों कोनों में बिंदियां लगाएं।
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥
सरल अर्थ: परम ऐश्वर्यशाली इन्द्र हमारा कल्याण करें, ज्ञान के भण्डार पूषा देव हमारा कल्याण करें, गरुड़ देव और बृहस्पति हमारा मंगल करें।
वाहन के स्टीयरिंग व्हील, साइड मिरर्स और इंजन के पास मौली (कलावा) 7 बार लपेटकर बांधें। इसके पश्चात गेंदे के फूलों की माला बोनट पर सादर पहनाएं।
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
सरल अर्थ: जिस रक्षासूत्र से महाबली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी से मैं इस वाहन को बांधता हूँ। हे रक्षासूत्र! तुम सदा स्थिर रहकर रक्षा करो।
पीतल के दीये में भीमसेनी कर्पूर प्रज्वलित कर वाहन के सम्मुख क्लॉकवाइज (प्रदक्षिणा क्रम में) 7 बार आरती घुमाएं। सपरिवार मिलकर 1 बार हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ करें।
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
सरल अर्थ: मन के समान तीव्र गति वाले, वायु समान वेग वाले, इंद्रियों को जीतने वाले, श्री रामदूत हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ।
पानीदार नारियल को वाहन के ठीक आगे जमीन पर एक प्रहार में फोड़ें। उसका जल गाड़ी के टायरों पर छिड़कें। इसके बाद चारों पहियों के ठीक आगे 1-1 पीला नींबू रखें। अब गाड़ी को स्टार्ट करके धीरे से आगे बढ़ाएं ताकि चारों नींबू पहिए के नीचे दबकर फूट जाएं।
ॐ हं हनुमते नमः। सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि॥
सरल अर्थ: हे पवनपुत्र हनुमान! मार्ग के समस्त विघ्न, बाधाएं और संकटों को भस्म करें।
बूंदी के लड्डुओं का भोग पहले वाहन पर स्थापित हनुमान जी को लगाएं। फिर चालक और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद दें। उपस्थित मित्रों व राहगीरों में भी प्रसाद बांटें।
त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर॥
सरल अर्थ: हे प्रभु! आपकी दी हुई वस्तु ही मैं आपको समर्पित करता हूँ। इसे स्वीकार कर प्रसन्न हों।
ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा॥
अर्थ: असीम बलशाली अंजनी पुत्र भगवान हनुमान को मेरा नमन है, वे मेरी यात्रा में संकटों से रक्षा करें।
लाभ: वाहन चलाते समय इस मंत्र के स्मरण से भय, असावधानी और दुर्घटनाओं का भय समाप्त होता है।
अग्रतः पृष्ठतश्चैव पार्श्वयोश्च महाबलौ। आंजनेयश्च कुम्भश्च पातु मां सर्वदा पथि॥
अर्थ: महाबली आंजनेय हनुमान मेरे आगे, पीछे और दोनों पावों में रहकर मार्ग में सदा मेरी रक्षा करें।
लाभ: लंबी दूरी की यात्रा आरम्भ करते समय इसका 3 बार उच्चारण करें।
कुल 9 वस्तुएं
काशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन अथवा घर पर आकर शास्त्रसम्मत पूजन संपन्न कराया जाएगा।
पंडित सेवा बुक करेंनए वाहन की खरीद पर अथवा प्रत्येक दशहरे/दीपावली पर वाहन पर स्वास्तिक, नींबू-मिर्च, नारियल फोड़कर और हनुमान जी के सिंदूर से रक्षा सूत्र बांधने की विधि।
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