माता आण्डाल जन्मभूमि · तमिलनाडु सरकार का प्रतीक गोपुरम · वटपत्रशायी पेरुमल
नीलातुङ्गस्तनगिरितटीसुप्तमुद्बोध्य कृष्णं पारार्थ्यं स्वं श्रुतिशतशिरःसिद्धमध्यापयन्ती। स्वोच्छिष्टायां स्रजि निगलितं या बलात्कृत्य भुङ्क्ते गोदा तस्यै नम इदमभिधीयेत भूयोऽपि भूयः॥
भावार्थ: भगवान श्रीकृष्ण को जगाकर अपना अनन्य प्रेम प्रकट करने वाली माता गोदा (आण्डाल) को मेरा बारंबार नमन है।
पेरियालवार को तुलसी वाटिका में नन्हीं कन्या मिली। वयस्क होने पर माता आण्डाल का विवाह श्रीरंगम के भगवान रंगनाथ के साथ संपन्न हुआ और वे भगवान के विग्रह में समाहित हो गईं।
माता आण्डाल ने भगवान रंगनाथ के प्रति अनन्य प्रेम में "तिरुप्पावै" और "नाच्चियार तिरुमोझि" की रचना की। वे स्वयं भगवान को अर्पित करने से पूर्व पुष्पमाला पहनकर देखती थीं, जिससे उन्हें "चूडिक्कुडुथ सुडर्कोडि" कहा गया।
11 मंजिला प्रस्तर गोपुरम जो दूर मीलों से दिखाई देता है और काष्ठ की अद्भुत नक्काशी से सजा माता आण्डाल का गर्भगृह।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| विश्वरूप दर्शन | प्रातः 06:30 | तुलसी माला श्रृंगार व सुप्रभातम् |
| सायं दीप आराधना | सायं 07:00 | आण्डाल-रंगमन्नार युगल महाआरती |
पारंपरिक धोती (शर्ट उतारना अनिवार्य)
साड़ी या सलवार सूट
💡 तुलसी वाटिका के समीप शांति बनाए रखें।
माता आण्डाल का जन्मदिवस व तमिलनाडु का सबसे विशाल रथोत्सव
30 दिनों तक तिरुप्पावै का अमृत गान
मदुरै एयरपोर्ट से 1.5 घंटे में टैक्सी द्वारा श्रीविल्लिपुत्तूर पहुँचा जा सकता है।
मदुरै-तेनकासी रेलमार्ग पर श्रीविल्लिपुत्तूर स्टेशन स्थित है।
मदुरै (75 किमी) और तिरुनेलवेली (95 किमी) से राष्ट्रीय राजमार्ग द्वारा नियमित बसें उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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