कलयुग के प्रत्यक्ष देव · वैकुंठ भूलोक · तिरुमला की सात पहाड़ियाँ
कौसल्या सुप्रजा राम पूर्वा सन्ध्या प्रवर्तते। उत्तिष्ठ नरशार्दूल कर्त्तव्यं दैवमाह्निकम्॥ श्री वेङ्कटेशं शरणं प्रपद्ये॥
भावार्थ: हे कौशल्यानंदन राम! पूर्व दिशा में उषाकाल प्रकट हो चुका है, जागिए और अपने नित्य देवकार्यों को पूर्ण कीजिए। हे वेंकटेश प्रभु! मैं आपकी शरण में आता हूँ।
जब महर्षि भृगु ने त्रिदेवों की परीक्षा ली और भगवान विष्णु के वक्षःस्थल पर प्रहार किया, तो माता लक्ष्मी रुष्ट होकर बैकुंठ छोड़ कोल्हापुर चली गईं। भगवान विष्णु उन्हें खोजते हुए शेषाचलम पर्वत पर आए और पद्मावती (आकाशराज की पुत्री) से विवाह किया। विवाह हेतु धन कुबेर से लिया गया ऋण वे कलयुग के अंत तक भक्तों के दान द्वारा चुका रहे हैं।
108 दिव्य देशमों में यह प्रमुख है। पल्लव रानी समवई ने 966 ईस्वी में यहाँ विग्रह प्रतिष्ठित किया। विजयनगर के महान सम्राट कृष्णदेवराय ने मंदिर के आनंद निलयम विमानम को सोने से मढ़वाया और बहुमूल्य रत्न भेंट किए। प्रतिदिन 60,000 से 1,00,000 श्रद्धालु यहाँ गोविंद-गोविंद के जयकारे के साथ दर्शन करते हैं।
मुख्य मंदिर के ऊपर स्थित "आनंद निलयम" पूर्णतः स्वर्ण मंडित है। गर्भगृह में 8 फीट ऊँची भगवान की दिव्य मूर्ति है। मान्यता है कि भगवान की मूर्ति के पृष्ठ भाग से निरंतर समुद्र की लहरों जैसी ध्वनि आती है और मूर्ति का तापमान सदैव 110°F (हल्का गर्म) रहता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| सुप्रभातम् सेवा | प्रातः 03:00 - 03:30 | भगवान को जगाने की अत्यंत पावन मधुर सेवा |
| तोमाला सेवा | प्रातः 03:30 - 04:00 | दिव्य पुष्पों और तुलसी मालाओं से श्रृंगार |
| सहस्रनाम अर्चना | प्रातः 04:45 - 05:30 | 1000 पावन नामों का पाठ |
| एकांत सेवा (शयनम्) | रात्रि 01:30 बजे | रात्रि में भगवान को विश्राम |
सख्त नियम: केवल सफेद धोती एवं उत्तरीय (अंगवस्त्रम) या सादा कुर्ता-पायजामा। पैंट, शर्ट, टी-शर्ट, लुंगी या जीन्स पूर्णतः वर्जित हैं।
केवल पारंपरिक साड़ी या दुपट्टा सहित सलवार-कमीज। लेगिंग्स, जींस, वेस्टर्न वियर में प्रवेश वर्जित।
💡 वैदिक वेशभूषा का पालन न करने पर प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया जाता है।
9 दिनों तक गरुड़ वाहन, हनुमान वाहन व रथ पर भव्य सवारी
वैकुंठ द्वार खुलता है, जिससे होकर गुजरने पर मोक्ष मिलता है
एक ही दिन में भगवान सात अलग-अलग वाहनों पर दर्शन देते हैं
तिरुपति एयरपोर्ट से चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली के लिए नियमित उड़ानें हैं। एयरपोर्ट से तिरुमला 1 घंटे में कैब से पहुँचें।
तिरुपति और रेणिगुंटा से देश के सभी कोनों के लिए रेल सेवा है। स्टेशन से तिरुमला पहाड़ी के लिए हर 2 मिनट पर बसें चलती हैं।
बेंगलुरु (250 किमी), चेन्नई (140 किमी) और हैदराबाद (550 किमी) से सीधी राष्ट्रीय राजमार्ग कनेक्टिविटी और APSRTC बसें।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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