108 दिव्य देशमों में प्रथम व सर्वश्रेष्ठ · भूलोक वैकुंठ
कावेरी विरजा सेयं साक्षात् वैकुण्ठमक्षरम्। श्रीरंगनगरी रम्या यत्र साक्षात् परं पदम्॥
भावार्थ: यहाँ कावेरी ही विरजा नदी है, यह श्रीरंगम नगरी ही साक्षात् परम वैकुंठ है जहाँ साक्षात् परमात्मा रंगनाथ विराजमान हैं।
प्रभु श्री राम ने लंका विजय के पश्चात यह विग्रह विभीषण को दिया था। विभीषण जब लंका जा रहे थे, तब कावेरी तट पर इसे विश्राम हेतु रखा, जिसके बाद यह विग्रह यहीं स्थापित हो गया।
रामानुजाचार्य जी ने अपने जीवन के अंतिम 60 वर्ष यहीं बिताए और उनका पार्थिव शरीर आज भी यहाँ सुरक्षित है। 12 आलवार संतों द्वारा पूजित यह प्रथम दिव्य देशम है।
7 संकेंद्रित परिक्रमा प्राचीर (सप्त प्रकार), 21 भव्य गोपुरम जिनमें राजगोपुरम 236 फीट (73 मीटर) ऊँचा है। 1000 स्तंभों वाला विशाल महामंडप।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| विश्वरूप सेवा | प्रातः 06:00 - 07:15 | प्रातः प्रथम दर्शन |
| उचिक्कलम पूजा | दोपहर 12:00 - 01:00 | मध्याह्न महापूजा |
| सायराक्षै पूजा | सायं 06:00 - 07:00 | संध्या आरती |
| अर्धजामम पूजा | रात्रि 08:30 - 09:00 | रात्रि शयन पूजा |
धोती (सफेद वेष्टि) एवं उत्तरीय। शर्ट, पैंट या जीन्स गर्भगृह में वर्जित।
साड़ी या पारंपरिक हाफ-साड़ी / दुपट्टे सहित सलवार।
💡 पुरुषों को ऊपरी वस्त्र उतारकर सात्विक अंगवस्त्र धारण करना अनिवार्य है।
परमपद वासल (स्वर्ग द्वार) का खुलना, लाखों श्रद्धालु
विशाल महाकाष्ठ रथ परिक्रमा
त्रिची हवाई अड्डे से टैक्सी द्वारा 30 मिनट में मंदिर पहुँचा जा सकता है।
त्रिची जंक्शन से देश के सभी प्रमुख शहरों से सुपरफास्ट ट्रेनें हैं।
चेन्नई, मदुरै, तंजावुर और बेंगलुरु से 4-लेन राजमार्ग द्वारा सुगम पहुंच।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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