चार धाम एवं 12 ज्योतिर्लिंगों में दक्षिण का मुकुटमणि · पावन सेतुबंध
सुताम्रपर्णीजलराशियोगे निबध्य सेतुं विशिखैरसंख्यैः। श्रीरामचन्द्रेण समर्पितं तं रामेश्वराख्यं नियतं नमामि॥
भावार्थ: जिन्होंने असंख्य बाणों द्वारा ताम्रपर्णी और समुद्र के संगम पर सेतु बांधकर श्रीरामचंद्र जी द्वारा समर्पित उन भगवान रामेश्वर महादेव की मैं नित्य वंदना करता हूँ।
रावण का वध करने के पश्चात ब्रह्म-हत्या के दोष से मुक्ति पाने हेतु महर्षि अगस्त्य ने भगवान राम को शिव पूजा का निर्देश दिया। हनुमान जी को कैलाश से शिवलिंग लाने भेजा गया, परंतु शुभ मुहूर्त बीतते देख माता सीता ने समुद्र की बालू से एक दिव्य लिंग बनाया जिसे "रामनाथ" कहा गया। हनुमान जी द्वारा लाए गए लिंग को "विश्वलिंग" नाम देकर सर्वप्रथम पूजने का वरदान दिया गया।
यह स्थल चार धाम और 12 ज्योतिर्लिंग दोनों में सम्मिलित होने वाला एकमात्र दक्षिण भारतीय महातीर्थ है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा है: "लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा॥" मंदिर का तीसरा गलियारा (आउटर कॉरिडोर) 1220 मीटर लंबा है और 1212 नक्काशीदार खंभों पर टिका है।
मंदिर के चारों ओर 38 मीटर ऊँचे गोपुरम हैं। मंदिर का विशालकाय गलियारा वास्तुकला का चमत्कार है। परिसर में 22 पावन "तीर्थम" (कुएं) हैं, जिनमें से प्रत्येक का जल भिन्न स्वाद और तापमान रखता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| पल्लियराई पूजा | प्रातः 05:00 बजे | प्रातःकालीन जागरण |
| कालसंधि पूजा | प्रातः 07:00 बजे | नित्य अभिषेक |
| उचिकलम दोपहर पूजा | दोपहर 12:00 बजे | मध्याह्न भोग |
| सायरट्चई सायं पूजा | सायं 06:00 बजे | दीप आराधना |
| अर्थजाम पूजा (शयन) | रात्रि 08:30 - 09:00 | दिन की अंतिम पूजा |
धोती-अंगवस्त्रम अनिवार्य (कमीज उतारकर प्रवेश का नियम)। पैंट, टी-शर्ट, जींस में गर्भगृह प्रवेश नहीं मिलता।
साड़ी, हाफ साड़ी या सलवार-कमीज (दुपट्टे सहित)।
💡 22 कुंडों में स्नान के उपरांत सूखे वस्त्र बदलकर ही मुख्य मंदिर में प्रवेश की अनुमति है।
10 दिवसीय विशाल उत्सव और चांदी के रथ पर सवारी
भगवान रामनाथ एवं माता पर्वतवर्धिनी का दिव्य विवाहोत्सव
भगवान नटराज का भव्य अभिषेक
मदुरै एयरपोर्ट से 3.5 घंटे में टैक्सी द्वारा ऐतिहासिक पंबन पुल पार कर रामेश्वरम पहुँचा जा सकता है।
रामेश्वरम सीधे चेन्नई, मदुरै, कोयंबटूर, तिरुपति और वाराणसी से ट्रेनों द्वारा जुड़ा है।
पंबन सड़क पुल (Annai Indira Gandhi Road Bridge) समुद्र के ऊपर से गुजरता है जो एक रोमांचक दृश्य प्रस्तुत करता है।
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