उत्तर भारत का प्रमुख दिव्य देशम · 88,000 ऋषियों की तपोभूमि · चक्रतीर्थ
नैमिषे सुप्रतीकश्च देवराट् च स्वयं हरिः। चक्रमध्ये स्थिता देवी सर्वपापप्रणाशिनी॥
भावार्थ: नैमिषारण्य में साक्षात देवराज हरि निवास करते हैं और चक्रतीर्थ समस्त पापों का नाश करता है।
भगवान विष्णु यहाँ वन रूप (अरण्य स्वरूप) में स्वयं प्रतिष्ठित हैं। तिरुमंगै आलवार ने इस पावन धाम की महिमा में 10 दिव्य पाशुरम गाए हैं।
ब्रह्मा जी ने तपस्या हेतु संपूर्ण ब्रह्मांड में सबसे पवित्र भूमि खोजने के लिए एक सूर्य-समान मनोमय चक्र छोड़ा था। वह चक्र जहाँ गिरा (नेमि विदीर्ण हुई), वह स्थल "नैमिषारण्य" कहलाया। यहाँ का चक्रतीर्थ सरोवर गोल आकार में पावन जल से परिपूर्ण है।
वृत्ताकार पावन चक्रतीर्थ कुण्ड जिसके भीतर से अनवरत शीतल जलधारा निकलती है, ललिता देवी शक्तिपीठ, और व्यास गद्दी जहाँ वेदों का विभाजन हुआ था।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 05:30 | चक्रतीर्थ जल अभिषेक व तुलसी अर्पण |
| संध्या महाआरती | सायं 07:00 | गोमती तट व चक्रतीर्थ दीपदान |
धोती-कुर्ता या सादे परिधान
साड़ी या सलवार सूट
💡 चक्रतीर्थ सरोवर में स्वच्छता बनाए रखें।
लाखों श्रद्धालुओं का चक्रतीर्थ में पावन स्नान
हजारों संतों की 15 दिवसीय पावन पदयात्रा
लखनऊ एयरपोर्ट से 2 घंटे में कैब द्वारा नैमिषारण्य पहुँचा जा सकता है।
बालामऊ जंक्शन या सीतापुर से लोकल ट्रेनें व बसें सुलभ हैं।
लखनऊ (80 किमी), सीतापुर (35 किमी) और हरदोई से नियमित उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन बसें उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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