दारुकावन में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग · विष व भय नाशक · द्वारका, गुजरात
याम्ये सदङ्गे नगरेऽतिरम्ये विभूषिताङ्गं विविधैश्च भोगैः। सद्भक्तिमुक्तिप्रदमीशमेकं श्रीनागनाथं शरणं प्रपद्ये॥
भावार्थ: अति रमणीय दारुकावन नगर में जो नाना प्रकार के भोगों और आभूषणों से सुशोभित हैं, जो सद्-भक्ति और मुक्ति को देने वाले हैं, उन एक मात्र भगवान नागनाथ (नागेश्वर) की मैं शरण लेता हूँ।
दारुक नामक राक्षस और उसकी पत्नी दारुका ने दारुकावन में शिवभक्त सुप्रिय नामक वैश्य को बंदी बना लिया। सुप्रिय ने कारागार में भगवान शिव की अनन्य पार्थिव पूजा की। जब दारुक सुप्रिय का वध करने दौड़ा, तब एक उज्ज्वल ज्योतिस्तंभ से भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने अपने पाशुपतास्त्र से दैत्यों का संहार किया और "नागेश्वर" नाम से प्रतिष्ठा पाई।
शिवपुराण के अनुसार नागेश्वर प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता है जो पृथ्वी के अधोभाग (पाताल) तक फैला है। यहाँ का शिवलिंग त्रिमुखी रुद्राक्ष के आकार का लाल पत्थर (दारुका शिला) का है। टी-सीरीज़ के गुलशन कुमार के संकल्प से यहाँ का कायाकल्प हुआ।
मंदिर के बाहर स्थापित 82 फीट (25 मीटर) ऊँची भगवान शिव की पद्मासन मुद्रा में ध्यानस्थ मूर्ति कला का अनुपम नमूना है। गर्भगृह भूतल से थोड़ा नीचे है जहाँ पूर्व दिशा में नंदी की विशाल प्रतिमा और अरघे में त्रिनेत्र शिवलिंग स्थापित है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 05:30 बजे | प्रातःकालीन प्रथम दर्शन |
| मध्याह्न भोग आरती | दोपहर 12:00 बजे | राजभोग अर्पण |
| संध्या महाआरती | सायं 07:00 बजे | दीपों से आरती |
| शयन आरती | रात्रि 08:30 बजे | रात्रि विश्राम |
गर्भगृह में अभिषेक हेतु केवल सात्विक धोती। सामान्य दर्शन हेतु शालीन परिधान।
साड़ी या सलवार-सूट।
💡 जल और दुग्धाभिषेक हेतु मंदिर काउंटर से शुद्ध सामग्री उपलब्ध होती है।
विशाल मेला और रात भर रुद्राभिषेक
हजारों कांवड़ियों का जलाभिषेक
जामनगर या राजकोट एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा द्वारका होते हुए नागेश्वर पहुँचें।
द्वारका रेलवे स्टेशन से ऑटो या टैक्सी द्वारा मात्र 20 मिनट में नागेश्वर मंदिर पहुँच सकते हैं।
द्वारका से बेंट द्वारका जाने वाले मार्ग पर उत्तम पक्की सड़क है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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