द्वादश ज्योतिर्लिंग एवं 18 महाशक्तिपीठों का पावन संगम · दक्षिण का कैलाश · आंध्र प्रदेश
श्रीशैलशृङ्गे विबुधातिसङ्गे तुलाद्रितुङ्गेऽपि मुदा वसन्तम्। तमर्जुनं मल्लिकपूर्वमेनं नमामि संसारसमुद्रसेतुम्॥
भावार्थ: श्रीशैल पर्वत के पावन शिखर पर जो देवताओं की संगति में आनंदपूर्वक निवास करते हैं, जो संसार रूपी भवसागर को पार कराने वाले सेतु हैं, उन भगवान मल्लिकार्जुन को मैं नमन करता हूँ।
जब भगवान कार्तिकेय और गणेश जी के बीच पृथ्वी परिक्रमा की प्रतियोगिता हुई और गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा कर विजय पाई, तो कार्तिकेय रुष्ट होकर क्रौंच पर्वत चले गए। अपने प्रिय पुत्र को मनाने हेतु भगवान शिव और माता पार्वती यहाँ पधारे। माता पार्वती "मल्लिका" (चमेली) के फूलों से शिवजी की पूजा करती थीं, अतः भगवान का नाम "मल्लिकार्जुन" पड़ा।
महाभारत के वनपर्व में श्रीशैलम का विशद वर्णन है जहाँ पांडवों ने शिव आराधना की थी। छत्रपति शिवाजी महाराज ने यहाँ आकर मंदिर के उत्तरी गोपुरम का निर्माण कराया था और माता भ्रमराम्बा ने उन्हें भवानी तलवार भेंट की थी। आदि शंकराचार्य ने यहीं रहकर अपने प्रसिद्ध ग्रंथ "शिवानंद लहरी" की रचना की थी।
मंदिर का परकोटा 20 फीट ऊँचा और 600 फीट लंबा है, जिस पर रामायण, महाभारत और शिवलीलाओं के प्रसंगों को सजीव रूप में पत्थरों पर उकेरा गया है। मंदिर के निकट "पाताल गंगा" है जहाँ पहुँचने हेतु 852 सीढ़ियां या आधुनिक रोपवे उपलब्ध है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| सुप्रभातम् | प्रातः 04:30 - 05:00 | प्रातःकालीन जागरण |
| महा मंगला आरती | प्रातः 06:00 - 06:30 | दिन की मुख्य आरती |
| प्रदोष काल पूजा | सायं 05:30 - 06:30 | संध्याकालीन अभिषेक |
| एकांत सेवा | रात्रि 09:30 - 10:00 | शयन आरती |
गर्भगृह स्पर्श दर्शन हेतु: केवल धोती एवं उत्तरीय (अंगवस्त्रम)। सामान्य दर्शन: शालीन कुर्ता-पायजामा।
केवल पारंपरिक साड़ी या सलवार-कमीज।
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7 दिवसीय भव्य रथोत्सव और पाताल गंगा में लाखों का पावन स्नान
महाराष्ट्र व कर्नाटक से लाखों पदयात्रियों का आगमन
लाखों दीपों से जगमगाता मंदिर प्रांगण
हैदराबाद एयरपोर्ट से 4.5 घंटे में कैब या सरकारी बस द्वारा नल्लामाला अभयारण्य से होते हुए श्रीशैलम पहुँच सकते हैं।
मरकापुर रोड स्टेशन से श्रीशैलम के लिए नियमित बसें और टैक्सियां उपलब्ध हैं।
हैदराबाद (215 किमी), विजयवाड़ा (260 किमी) और गुंटूर (210 किमी) से सुंदर पहाड़ी व जंगली रास्तों से शानदार कनेक्टिविटी।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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