दक्षिण काशी · पापनाशम तट पर 2000 वर्ष प्राचीन महाविष्णु पीठ
नमो नमस्ते जनार्दनाय नमो नमस्ते पुरुषोत्तमाय। नमो नमस्ते कमलासनाय नमो नमस्ते गरुड़ध्वजाय॥
भावार्थ: हे जनार्दन! हे पुरुषोत्तम! हे गरुड़ध्वज महाविष्णु! आपको मेरा बारंबार नमस्कार है।
पापनाशम समुद्र तट पर स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है। यहाँ पितृ तर्पण (बली तर्पणम) का गया और वाराणसी के समान ही फल माना जाता है।
देवर्षि नारद के प्रायश्चित्त हेतु भगवान ब्रह्मा ने यहाँ तप किया था। मान्यता है कि भगवान जनार्दन का दाहिना हाथ धीरे-धीरे उनके मुख की ओर बढ़ रहा है—जिस दिन यह हाथ मुख तक पहुँचेगा, कलियुग का अंत होकर प्रलय होगा।
गोल गर्भगृह (श्रीकोविल) जिसकी छत पर काष्ठ की सुंदर नक्काशी है, और डच जहाजी कैप्टन द्वारा अर्पित विशाल कांस्य घंटी।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| उषा पूजा | प्रातः 05:30 | सुगंधित चंदन लेप व तुलसी अर्पण |
| दीपाराधना | सायं 06:30 | पारंपरिक चेंगिला वाद्य व दीप प्रज्वलन |
धोती (मुंडू) अनिवार्य, शर्ट/बनियान उतारना अनिवार्य
साड़ी या सलवार सूट
💡 समुद्र स्नान के पश्चात स्वच्छ होकर ही मंदिर परिसर में जाएं।
10 दिवसीय उत्सव जिसमें सजे हुए हाथियों की शोभायात्रा सागर तट तक जाती है
लाखों श्रद्धालुओं का समुद्र तट पर पितृ तर्पण
त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट से 1 घंटे में कैब द्वारा वरकला पहुँचा जा सकता है।
वरकला शिवगिरि स्टेशन पर सभी प्रमुख ट्रेनें रुकती हैं। स्टेशन से ऑटो द्वारा 10 मिनट।
तिरुवनंतपुरम (45 किमी) और कोल्लम (35 किमी) से राष्ट्रीय राजमार्ग 66 द्वारा सीधी बसें हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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