सनातन चार धामों में पूर्व धाम · महाप्रभु का लीला क्षेत्र · श्रीक्षेत्र पुरी
कदाचित् कालिन्दी-तट-विपिन-सङ्गीत-तरलो मुदाभीरी-नारी-वदन-कमलास्वाद-मधुपः। रमाशम्भु-ब्रह्मा-सुरपति-गणेशार्चित-पदो जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥
भावार्थ: जो कभी यमुना तीर के वनों में अपनी मुरली की तान से आनंद बरसाते थे, जिनके चरणों की वंदना लक्ष्मी, शिव, ब्रह्मा, इंद्र और गणेश करते हैं, वे जगन्नाथ स्वामी मेरे नेत्रों के सम्मुख प्रकट हों।
द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी देहलीला समेटी, तो उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ किंतु उनका हृदय (ब्रह्म पदार्थ) आज भी स्पंदित होता रहा। राजा इंद्रद्युम्न को समुद्र में तैरता हुआ पवित्र दारु (काष्ठ लट्ठा) मिला जिससे विश्वकर्मा जी ने वृद्ध बढ़ई रूप में मूर्तियां गढ़ीं।
स्कंद पुराण के उत्कल खंड में मंदिर का विशद वर्णन है। आदि शंकराचार्य ने यहाँ गोवर्धन मठ की स्थापना की। चैतन्य महाप्रभु ने अपने जीवन के अंतिम 24 वर्ष यहीं नाम संकीर्तन में व्यतीत किए। मंदिर की रसोई विश्व की सबसे बड़ी रसोई मानी जाती है जहाँ मिट्टी के बर्तनों में 56 भोग तैयार होते हैं।
मंदिर 214 फीट ऊँचा है। इसके शीर्ष पर स्थापित नीलचक्र और ध्वज हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी या हवाई जहाज नहीं उड़ता। सिंहद्वार में प्रवेश करते ही समुद्र की प्रचंड लहरों की आवाज भीतर पूरी तरह लुप्त हो जाती है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 05:00 - 06:00 | सर्वप्रथम दर्शन |
| मैलाम एवं अवकाश | प्रातः 06:00 - 07:00 | वस्त्र परिवर्तन एवं दंतधावन |
| गोपाल बल्लभ भोग | प्रातः 09:00 बजे | बाल भोग |
| संध्या धूप एवं आरती | सायं 07:00 - 08:30 | दीपों से भव्य आरती |
| बड़ा सिंगार भोग एवं शयन | रात्रि 10:30 - 11:30 | पुष्पों से सजावट एवं रात्रि विश्राम |
धोती, कुर्ता-पायजामा। पश्चिमी छोटे वस्त्र वर्जित।
साड़ी या सलवार सूट। मर्यादापूर्ण परिधान।
💡 सिंहद्वार पर जूता-चप्पल स्टैंड और क्लॉक रूम उपलब्ध है।
लाखों श्रद्धालु तालध्वज, दर्पदलन और नंदीघोष रथों को खींचते हैं
नरेंद्र सरोवर में प्रभु की जल-क्रीड़ा
108 स्वर्ण कलशों से स्नान के बाद प्रभु 15 दिन अनवसर (विश्राम) में रहते हैं
भुवनेश्वर एयरपोर्ट से राष्ट्रीय राजमार्ग पर 1 घंटे की ड्राइव द्वारा पुरी पहुँच सकते हैं।
पुरी रेलवे स्टेशन से मंदिर मात्र 10 मिनट की दूरी पर है। हावड़ा, दिल्ली, चेन्नई, मुंबई से ट्रेनें उपलब्ध हैं।
भुवनेश्वर-पुरी मरीन ड्राइव और 4-लेन NH-316 से बेहतरीन कनेक्टिविटी।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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