भारत के प्रमुख चार धामों में सर्वश्रेष्ठ · वैकुंठ भूलोक · चमोली
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
भावार्थ: जिनका स्वरूप शांत है, जो शेषनाग की शैय्या पर शयन करते हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो देवताओं के स्वामी, विश्व के आधार, मेघ के समान श्याम वर्ण और समस्त भयों को हरने वाले हैं, उन भगवान विष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ।
जब भगवान विष्णु यहाँ कठोर तपस्या में लीन थे, तब तेज हिमपात और ठंड से उनकी रक्षा करने के लिए माता लक्ष्मी ने स्वयं एक बेर (बदरी) का वृक्ष बनकर उन्हें अपनी छत्रछाया प्रदान की। तपस्या पूर्ण होने पर भगवान ने प्रसन्न होकर कहा कि इस स्थल पर मेरे साथ तुम्हारा नाम जुड़ेगा, अतः यह स्थल "बद्रीनाथ" कहलाया।
स्कंद पुराण में कहा गया है: "बहुनि सन्ति तीर्थानि दिवि भूमौ रसातले। बद्रीसदृशं तीर्थं न भूतं न भविष्यति॥" अर्थात् स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में अनेक तीर्थ हैं, परंतु बद्रीनाथ जैसा तीर्थ न कभी था और न कभी होगा। मंदिर के मुख्य पुजारी "रावल" कहलाते हैं जो केरल के नंबूदरी ब्राह्मण परिवार से होते हैं।
मंदिर का मुख्य आकर्षण इसका 50 फीट ऊँचा बहुवर्णी (रंग-बिरंगा) मुखौटा और सिंहद्वार है। गर्भगृह में 1 मीटर ऊँची शालिग्राम शिला पर चतुर्भुज मुद्रा में उत्कीर्ण ध्यानस्थ मूर्ति है। मंदिर के निकट "तप्त कुंड" है जिसमें बर्फीली ठंड में भी 55°C का प्राकृतिक गर्म पानी अनवरत बहता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| महाभिषेक आरती | प्रातः 04:30 - 06:30 | भगवान का विशुद्ध केसर व कस्तूरी से अभिषेक |
| गीता पाठ एवं भोग | दोपहर 12:00 बजे | श्रीमद्भगवद्गीता के अध्यायों का वाचन |
| संध्या महाआरती (गीत गोविंद) | सायं 06:00 - 07:30 | जयदेव कृत गीत गोविंद के पदों के साथ आरती |
| शयन आरती | रात्रि 08:30 - 09:00 | कपूर आरती एवं शयन |
धोती-कुर्ता या शालीन पैंट-शर्ट और गर्म ऊनी वस्त्र।
साड़ी या सलवार-सूट। गर्म जैकेट और शॉल आवश्यक।
💡 तप्त कुंड में स्नान करने से पूर्व पवित्र आचरण रखें।
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अलकनंदा के किनारे भव्य उत्सव और रात्रि जागरण
भगवान बद्रीविशाल अपनी माता मूर्ति से मिलने उनके मंदिर जाते हैं
देहरादून सहस्त्रधारा हेलीपैड से बद्रीनाथ हेलीपैड तक सीधी हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है (मात्र 45 मिनट)।
हरिद्वार या ऋषिकेश तक ट्रेन से पहुंचें, फिर जोशीमठ होते हुए सड़क मार्ग से बद्रीनाथ।
ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक ऑल-वेदर रोड (NH-7) पूरी तरह से पक्की है। जोशीमठ से बद्रीनाथ की दूरी मात्र 45 किमी है।
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