
सह्याद्रि की हरी-भरी वादियों में भीमा नदी का उद्गम · पुणे, महाराष्ट्र
यं डाकिनीशाकिनिकासमाजे निषेव्यमाणं पिशाचभूतैः। सदैव भीमादिकनामलीलं तं भीमशङ्करमीशमीडे॥
भावार्थ: डाकिनी और शाकिनी के समुदाय में भूतों और पिशाचों द्वारा जिनकी निरंतर सेवा की जाती है, जो भीमा आदि लीलाओं को रचने वाले हैं, उन भगवान भीमाशंकर को मैं प्रणाम करता हूँ।
शिवपुराण के अनुसार, रावण के भाई कुंभकर्ण का पुत्र भीम अपनी माता कर्कटी के साथ यहाँ रहता था। उसने ब्रह्मा जी से अजेय होने का वरदान पाकर देवों और मनुष्यों पर अत्याचार किए। जब उसने भगवान शिव के अनन्य भक्त राजा सुदक्षिण को कारागार में शिवलिंग की पूजा करते समय तलवार से प्रहार किया, तो भगवान शिव स्वयं शिवलिंग से प्रकट हुए और अपनी हुंकार मात्र से भीमासुर को भस्म कर दिया। ऋषियों की प्रार्थना पर वे यहीं भीमाशंकर रूप में प्रतिष्ठित हुए।
छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस पावन मंदिर को अनेक पूजा अनुदान दिए थे। पेशवा नाना फडणवीस ने मंदिर के विशाल शिखर और सभा मंडप का जीर्णोद्धार कराया तथा चिमाजी अप्पा द्वारा पुर्तगालियों पर विजय के उपरांत चढ़ाई गई विशाल रोमन घंटा मंदिर के बाहर आज भी सुशोभित है। यह क्षेत्र भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य का भी भाग है।
हेमाडपंथी स्थापत्य का उत्कृष्ट नमूना। गर्भगृह काफी नीचे स्थित है जिसमें एक विशाल स्वयंभू शिवलिंग है जिसके मध्य में एक दरार है। मंदिर के खंभों पर देवी-देवताओं और नर्तकियों की सुंदर आकृतियां उकेरी गई हैं।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| काकड़ आरती | प्रातः 04:30 - 05:00 | प्रातः जागरण |
| निजरूप आरती | प्रातः 05:30 बजे | विशुद्ध अभिषेक |
| महापूजा व नैवेद्य | दोपहर 12:00 - 12:30 | मध्याह्न भोग |
| संध्या आरती | सायं 07:30 - 08:00 | दीपों से आरती |
धोती-कुर्ता या शालीन पैंट-शर्ट। गर्भगृह स्पर्श दर्शन हेतु धोती-सोला अनिवार्य।
साड़ी या सलवार-कमीज।
💡 पहाड़ी सीढ़ियां उतरकर मंदिर तक जाना होता है, अतः आरामदायक जूते पहनें।
लाखों भक्तों का मेला और सह्याद्रि की पहाड़ियों में अनवरत हर-हर महादेव का घोष
कांवड़ियों द्वारा भीमा नदी के जल से अभिषेक
दीपदान और दीपमाला प्रज्वलन
पुणे एयरपोर्ट से 3.5 घंटे में सुंदर घाटियों से होते हुए टैक्सी या बस से भीमाशंकर पहुँच सकते हैं।
पुणे स्टेशन से शिवाजीनगर बस डिपो जाकर भीमाशंकर के लिए सीधी MSRTC बसें उपलब्ध हैं।
पुणे-नासिक हाईवे (NH-60) से मंचर होते हुए भीमाशंकर तक पक्की सड़क है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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