द्वादश ज्योतिर्लिंगों में "कामना लिंग" · विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला · झारखंड
पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसन्तं गिरिजासमेतम्। सुरासुराराधितपादपद्मं श्रीवैद्यनाथं सततं नमामि॥
भावार्थ: पूर्वोत्तर दिशा में चिताभूमि (देवघर) में जो माता पार्वती के साथ नित्य निवास करते हैं, जिनके चरण कमलों की वंदना देव और दानव दोनों करते हैं, उन भगवान श्री बैद्यनाथ को मैं निरंतर नमन करता हूँ।
लंकापति रावण ने हिमालय पर घोर तपस्या की और अपने दस शीश काटकर शिवजी को अर्पित किए। प्रसन्न होकर शिवजी ने उसके शीश पुनः जोड़ दिए (अतः वैद्यनाथ कहलाए) और लंका ले जाने हेतु एक शिवलिंग दिया, इस शर्त पर कि इसे मार्ग में भूमि पर मत रखना। जब रावण देवघर पहुँचा, तो वरुण देव की माया से उसे लघुशंका की तीव्र इच्छा हुई। उसने एक बैजू नामक ग्वाले (भगवान विष्णु) को लिंग थमा दिया, जिसने इसे भूमि पर रख दिया। रावण के बलपूर्वक उखाड़ने पर भी शिवलिंग टस से मस नहीं हुआ।
यहाँ प्रतिवर्ष श्रावण मास में विश्व का सबसे लंबा 105 किमी का कांवड़ मेला आयोजित होता है। सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर लाखों कांवड़िए नंगे पांव बोल-बम के जयकारों के साथ पैदल चलकर बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करते हैं। यहाँ भगवान शिव वैद्य (चिकित्सक) के रूप में समस्त असाध्य रोगों का निवारण करते हैं।
मंदिर प्रांगण में कुल 22 मंदिर हैं जिनमें बैद्यनाथ और पार्वती मंदिर प्रमुख हैं। मंदिर के शीर्ष पर त्रिशूल के स्थान पर एक दुर्लभ "पंचशूल" (पाँच फनों वाला शूल) स्थापित है जिसे महाशिवरात्रि से दो दिन पूर्व उतारा जाता है और विशेष पूजा के बाद पुनः स्थापित किया जाता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| प्रातः कांचा जल पूजा | प्रातः 04:00 - 05:00 | विशुद्ध कांचा जल से सरकारी पूजा |
| सायं श्रृंगार आरती | सायं 07:30 - 08:30 | पुष्पों व चंदन से अलौकिक श्रृंगार |
| शयन आरती | रात्रि 09:00 बजे | दिन की अंतिम आरती |
धोती, कुर्ता-पायजामा या गेरुआ वस्त्र (कांवड़ यात्रा में)।
साड़ी या सलवार-कमीज। मर्यादापूर्ण वस्त्र।
💡 श्रावण मास में कतार अत्यंत लंबी होती है, अतः स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
सुल्तानगंज से देवघर 105 किमी की अखंड पदयात्रा और 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का जलाभिषेक
पंचशूल की पावन पूजा एवं भव्य शिव बारात
मिथिलांचल के लाखों श्रद्धालु अबीर-गुलाल से बाबा का तिलक करने आते हैं
देवघर एयरपोर्ट से दिल्ली, कोलकाता, पटना और रांची के लिए सीधी उड़ानें हैं। एयरपोर्ट से मंदिर 15 मिनट में टैक्सी से पहुँच सकते हैं।
जसीडीह जंक्शन हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर स्थित है जहाँ राजधानी और दुरंतो सहित सभी बड़ी ट्रेनें रुकती हैं।
पटना (250 किमी), रांची (250 किमी) और कोलकाता (310 किमी) से सीधी बस और टैक्सी सेवाएं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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