अझगर पहाड़ी पर पावन दिव्य देशम · माता मीनाक्षी के दिव्य भ्राता सुंदरराजन
सुन्दरराजं सुरवरपूज्यं मङ्गलमूर्तिं माधवमीशम्। नूपुरगङ्गातीरनिवासं वन्देऽहं तं भक्तसुरेशम्॥
भावार्थ: नूपुर गंगा के तट पर निवास करने वाले, सुर-मुनियों द्वारा पूजित, मंगलमूर्ति भगवान सुंदरराजन को मेरा नमस्कार है।
महर्षि सुतपा (मांडूक्य ऋषि) को दुर्वासा ऋषि के शाप से मेढक बन जाने पर भगवान सुंदरराजन ने ही वैगई नदी के तट पर आकर मुक्ति प्रदान की थी। पहाड़ की चोटी पर स्थित "नूपुर गंगा" का जल भगवान के नूपुर (पायल) से प्रकट हुआ माना जाता है।
चित्तिरै ब्रह्मोत्सव में भगवान कल्लाझगर स्वर्ण अश्व (सोने के घोड़े) पर सवार होकर अपनी बहन मीनाक्षी के विवाह में सम्मिलित होने मदुरै की वैगई नदी में उतरते हैं। इस अलौकिक दृश्य को देखने 10 लाख से अधिक श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।
विशाल 7-तलीय राजगोपुरम, दीवारों पर उत्कृष्ट संगम कालीन काष्ठ नक्काशी, और मुख्य द्वार पर विराजमान कराप्पन स्वामी (क्षेत्रपाल)।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| विश्वरूप सेवा | प्रातः 06:00 | सुप्रभातम् व चंदन वंदन |
| सायं महादीप आरती | सायं 07:00 | सुंदरराजन-सुंदरावल्ली युगल दीप दर्शन |
धोती अनिवार्य (शर्ट उतारना नियम)
साड़ी या पारंपरिक सलवार सूट
💡 पहाड़ी परिसर में बंदरों से सावधान रहें।
स्वर्ण घोड़े पर कल्लाझगर का वैगई नदी में पावन प्रवेश (10 लाख श्रद्धालु)
पहाड़ी रथोत्सव व नूपुर गंगा महास्नान
मदुरै एयरपोर्ट से 45 मिनट में टैक्सी द्वारा अझगर कोविल पहुंचा जा सकता है।
मदुरै जंक्शन देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है, जहाँ से हर 10 मिनट में सीधी बसें उपलब्ध हैं।
मदुरै पेरियार बस स्टैंड से अझगर कोविल के लिए सरकारी बसें 24 घंटे उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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