हिरण्यकशिपु वध स्थली · 9 स्वयंभू नरसिंह पीठ · नल्लामाला वन पर्वत
उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
भावार्थ: परम उग्र, महापराक्रमी, सर्वव्यापी महाविष्णु, प्रज्वलित स्वरूप, मंगलकारी और मृत्यु की भी मृत्यु स्वरूप भगवान नृसिंह को मेरा नमन है।
जब भगवान नृसिंह ने हिरण्यकशिपु का संहार किया, तब देवताओं ने विस्मय से पुकारा—"अहो बलम्! अहो वीर्यम्!" (कैसा अद्भुत पराक्रम है!), जिससे इस पावन तीर्थ का नाम "अहोलबिलम" पड़ा।
यहाँ "उग्र स्तंभम" (वह पर्वत शिला जिसे चीरकर भगवान प्रकट हुए थे) और "रक्त कुण्ड" (जहाँ भगवान ने अपने हाथ धोए थे) आज भी प्रत्यक्ष विद्यमान हैं। श्री आदि शंकराचार्य ने यहीं "करावलंब स्तोत्र" की रचना की थी।
लोअर अहोलबिलम (प्रह्लाद वरद मंदिर) और अपर अहोलबिलम (उग्र नरसिंह, ज्वाला, क्रोड़ा, माल Old शैल गुफाएं) का 16 किमी का पावन वन परिक्रमा मार्ग।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| सुप्रभातम् व पंचामृत अभिषेक | प्रातः 06:30 | उग्र नरसिंह का शीतल चंदन अभिषेक |
| संध्या महाआरती | सायं 06:30 | सहस्त्र दीप प्रज्वलन व नृसिंह स्तुति |
धोती-कुर्ता या ट्रैकिंग हेतु सादे वस्त्र
साड़ी या सलवार सूट
💡 जंगल ट्रैकिंग हेतु मजबूत जूते और लाठी साथ रखें।
कल्याणोत्सव एवं दिव्य रथ परिक्रमा
आदिवासी चेंचु जनजाति संग भगवान का वन भ्रमण
कुर्नूल या तिरुपति एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा अहोलबिलम पहुँचा जा सकता है।
नंद्याल या कड़ापा रेलवे स्टेशन से अल्लागड्डा होते हुए बसें व टैक्सियां सुलभ हैं।
हैदराबाद (360 किमी), तिरुपति (230 किमी) और बेंगलुरु (340 किमी) से सीधी सड़क सेवा उपलब्ध है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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