सती का केशकलाप (केश गुच्छ) · माँ उमा कात्यायनी व भूतेश भैरव · ब्रजभूमि
कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
भावार्थ: हे कात्यायनी! हे महामाये! हे महायोगिनी! नन्दगोप के सुपुत्र श्रीकृष्ण को मेरा पति बनाइए, आपको मेरा नमन है।
सती के केश यहाँ गिरे थे जिससे इस क्षेत्र को परम पावन उमा-पीठ की प्रतिष्ठा मिली। यहाँ भूतेश्वर महादेव भैरव रूप में ब्रज की रक्षा करते हैं।
श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में गोपियों द्वारा कात्यायनी देवी की आराधना का अमर प्रसंग इसी पावन पीठ से जुड़ा हुआ है।
गर्भगृह में अष्टधातु की माँ कात्यायनी की चतुर्भुज प्रतिमा, भगवान शिव, लक्ष्मी-नारायण, श्री गणेश एवं कार्तिकेय के सुंदर मंदिर स्थित हैं।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 07:00 | माता का पुष्प व धूप श्रृंगार |
| संध्या आरती | सायं 07:30 | संध्याकालीन दीपदान व चंडी पाठ |
धोती-कुर्ता या सादे परिधान
साड़ी या सलवार सूट
💡 मंदिर प्रांगण में मौन और शालीनता बनाए रखें।
9 दिनों तक अखंड चंडी यज्ञ एवं कुमारी पूजन
गोपियों की स्मृति में विशेष अर्चना
दिल्ली या आगरा एयरपोर्ट से यमुना एक्सप्रेसवे द्वारा सड़क मार्ग से सुगम पहुंच।
मथुरा जंक्शन से ऑटो या ई-रिक्शा द्वारा 25 मिनट में वृंदावन पहुंचा जा सकता है।
दिल्ली, आगरा और जयपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 19 द्वारा सीधी बसें और टैक्सियां उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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