सती का बायां कंधा (वाम स्कंध) · माँ उमा वनदुर्गा व महोदर भैरव · महाकवि कालिदास पीठ
मिथिलायां वामस्कन्ध उमा देवी महोदरः। उच्चैष्ठपीठमाश्रित्य विद्याबुद्धिप्रदायिनी॥
भावार्थ: मिथिला में सती का बायां कंधा गिरा जहाँ उमा देवी और महोदर भैरव वास करते हैं और विद्या-बुद्धि प्रदान करते हैं।
सती के वाम स्कंध गिरने से माता वनदुर्गा के रूप में प्रतिष्ठित हुईं। यहाँ माता की मूर्ति मस्तक विहीन (कमल पीठ) मानी जाती है जिस पर भक्त पुष्प अर्पित करते हैं।
कालिदास ने माता की परीक्षा में सफल होकर एक ही रात में संपूर्ण विद्या प्राप्त की थी। मंदिर प्रांगण में आज भी "कालिदास डीह" (अध्ययन स्थली) मौजूद है।
कमल रूपी प्रस्तर पीठ जिस पर माता भगवती की पावन छबि विराजमान है और समीप ही प्राचीन तालाब व वटवृक्ष स्थित है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| प्रातः आरती | प्रातः 06:00 | सरस्वती व दुर्गा संयुक्त स्तुति |
| संध्या महाआरती | सायं 07:00 | पारंपरिक मिथिला गीतों संग दीपदान |
धोती-कुर्ता या सादे परिधान
साड़ी या सलवार सूट
💡 कालिदास डीह की पवित्रता बनाए रखें।
विद्यार्थियों का विशाल मेला व अक्षराभ्यास
निशा पूजा व शतचंडी महायज्ञ
दरभंगा एयरपोर्ट से मात्र 50 मिनट में टैक्सी द्वारा उच्चैठ भगवती मंदिर पहुँचा जा सकता है।
मधुबनी और दरभंगा स्टेशन से बेनीपट्टी होते हुए ऑटो व बसें सुलभ हैं।
दरभंगा से एनएच 527 होकर बेनीपट्टी (35 किमी) सड़क मार्ग द्वारा उत्तम संपर्क है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
माँ उच्चैठ भगवती शक्तिपीठ (मिथिला, बिहार) पूजा किट देखें🔱 माँ उच्चैठ भगवती शक्तिपीठ (मिथिला, बिहार) दर्शन / पूजा हेतु पंडित बुक करें