
सती का दायाँ स्कंध (कंधा) · माँ तुलजा भवानी व अमृत भैरव · छत्रपति शिवाजी कुलस्वामिनी
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
भावार्थ: हे समस्त मंगलों का मंगल करने वाली, कल्याणमयी, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला माँ भवानी! आपको नमस्कार है।
अनुभूति नामक ऋषि-पत्नी की रक्षा हेतु माता त्वरित (शीघ्र) प्रकट हुईं, अतः उन्हें "त्वरिता" या "तुलजा" कहा गया। सती का दायाँ कंधा यहाँ गिरा था।
शिवाजी महाराज प्रत्येक युद्ध से पूर्व माँ भवानी के चरणों में शीश नवाते थे। समर्थ रामदास स्वामी ने यहीं साधना की थी। मंदिर में कल्लोल और गोमुख तीर्थ नामक पावन जल कुंड हैं।
3 फीट ऊंची स्वयंभू अष्टभुजी गंडकी शिला प्रतिमा जो चल (Chala Murti) स्वरूप में है—वर्ष में तीन बार सिंहासन से हटाकर निद्रा हेतु पलंग पर रखी जाती है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| चरणामृत आरती | प्रातः 05:00 | पंचामृत अभिषेक व काकड़ आरती |
| धूप आरती | दोपहर 12:00 | पूरनपोली नैवेद्य अर्पण |
| सेज आरती | रात्रि 09:30 | रात्रि विश्राम शयन आरती |
धोती-कुर्ता, पायजामा या सादे वस्त्र
साड़ी या सलवार सूट
💡 गोमुख तीर्थ में हाथ-मुँह धोकर ही गर्भगृह में जाएं।
छत्रपति शिवाजी महाराज की भवानी तलवार पूजन व पालकी उत्सव
लाखों मशालों के प्रकाश में माँ का भव्य रथोत्सव
सोलापुर या पुणे एयरपोर्ट से राष्ट्रीय राजमार्ग 52 द्वारा सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है।
सोलापुर जंक्शन देश के सभी हिस्सों से जुड़ा है जहाँ से 1 घंटे में बस/टैक्सी द्वारा तुलजापुर पहुंचा जाता है।
सोलापुर (45 किमी), पुणे (290 किमी) और मुम्बई (440 किमी) से चौबीसों घंटे सीधी बसें उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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