सती की नासिका (नाक) · माँ सुनंदा व त्र्यंबक भैरव · सुगंधा नदी तट
सुगन्धायां नासिका मे त्र्यम्बको भैरवस्तथा। सुनन्दा सा महादेवी भक्तानामभयप्रदा॥
भावार्थ: सुगंधा में सती की नासिका गिरी जहाँ सुनंदा देवी और त्र्यंबक भैरव अभय प्रदान करते हैं।
सती की नासिका के पतन से इस संपूर्ण क्षेत्र में दिव्य सुगंध का प्रसार हुआ, जिससे नदी का नाम "सुगंधा" और देवी का नाम "सुनंदा" पड़ा।
अविभाजित बंगाल का यह अत्यंत प्रतिष्ठित शक्तिपीठ है। भैरव का मुख्य मंदिर झलकाठी के पोनबोबलिया में स्थित है जिसे "त्र्यंबक" कहा जाता है।
सुगंधा नदी के शांत तट पर स्थित प्रस्तर मंदिर जहाँ देवी की पाषाण प्रतिमा स्थापित है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| प्रातः आरती | प्रातः 06:30 | नासिका पीठ प्रक्षालन व पुष्प अर्पण |
| संध्या आरती | सायं 06:30 | नदी तट पर शंखनाद व दीपदान |
धोती-कुर्ता या सादे परिधान
साड़ी या सलवार सूट
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