सती के ऊपर के दाँत (ऊर्ध्व दंत) · माँ नारायणी व संहार भैरव · त्रिमूर्ति धाम
शुचौ च नारायणी देवी संहारो भैरवस्तथा। ऊर्ध्वदन्ताः पतिता यत्र सर्वशुद्धिप्रदायिनी॥
भावार्थ: शुचींद्रम में नारायणी देवी और संहार भैरव वास करते हैं, जहाँ सती के ऊपर के दाँत गिरे और जो अंतःकरण को शुद्ध करते हैं।
सती के ऊर्ध्व दंत गिरने से यह स्थान पापों से शुद्धि प्रदान करने वाला परम नारायणी पीठ बना।
देवराज इंद्र ने गौतम ऋषि के शाप से मुक्ति पाने हेतु यहाँ माँ नारायणी और त्रिमूर्ति की तपस्या कर शुद्धि प्राप्त की थी (अतः नाम "शुचींद्रम")। यहाँ 22 फीट ऊंची विशाल अंजनेय (हनुमान) प्रतिमा और संगीत निकालने वाले प्रस्तर स्तंभ हैं।
एक ही ग्रेनाइट शिला से तराशे गए संगीतमय स्तंभ (Musical Pillars) जिन्हें थपथपाने पर शास्त्रीय सप्त सुरों की गूंज निकलती है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| उषा पूजा | प्रातः 06:00 | स्थानुमलयन लिंग व नारायणी अभिषेक |
| सायं महादीप आरती | सायं 07:00 | पंचमुख दीप व शंखनाद |
धोती अनिवार्य, शर्ट/बनियान उतारना अनिवार्य
साड़ी या सलवार सूट
💡 मंदिर के संगीतमय स्तंभों को क्षति न पहुँचाएं।
10 दिवसीय विशाल रथ यात्रा जिसमें विशाल रथ नगर में घूमता है
माँ नारायणी का विशेष पुष्प पल्लक उत्सव
त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट से 2 घंटे में कैब द्वारा शुचींद्रम पहुँचा जा सकता है।
नागरकोइल जंक्शन मुख्य रेलवे स्टेशन है, जहाँ से 15 मिनट में ऑटो/बस उपलब्ध है।
कन्याकुमारी (13 किमी) और नागरकोइल से हर 5 मिनट में सरकारी बसें उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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