सती का उदर (पेट भाग) · माँ चंद्रभागा व वक्रतुंड भैरव · सोमनाथ प्रभास क्षेत्र
प्रभासे चोदरे देवी चन्द्रभागा प्रकीर्तिता। वक्रतुण्डश्च भैरवो भक्तानां कामपूरकः॥
भावार्थ: प्रभास क्षेत्र में सती का उदर गिरा जहाँ चंद्रभागा देवी और वक्रतुंड भैरव भक्तों की समस्त कामनाओं को पूर्ण करते हैं।
सती के उदर भाग के पतन से यह क्षेत्र पोषण और अन्नपूर्णा शक्ति का परम केंद्र बन गया।
चंद्रदेव ने दक्ष प्रजापति के क्षय रोग के शाप से मुक्ति पाने हेतु यहीं सोमनाथ महादेव और माँ चंद्रभागा की आराधना कर पुनः कांति प्राप्त की थी।
समुद्र तट के समीप प्राचीन प्रस्तर मंदिर जहाँ देवी की सौम्य चंद्रमुखी पाषाण प्रतिमा विराजित है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| प्रातः मंगला आरती | प्रातः 06:30 | पंचामृत स्नान व सिंदूर वंदन |
| संध्या आरती | सायं 07:00 | समुद्री तट पर दीप प्रज्वलन |
धोती-कुर्ता या सादे परिधान
साड़ी या सलवार सूट
💡 त्रिवेणी संगम पर पवित्रता बनाए रखें।
त्रिवेणी संगम पर महास्नान व दीपदान
विशेष चंडी यज्ञ व अभिषेक
दीव या राजकोट एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा सोमनाथ प्रभास पाटन पहुँचा जाता है।
वेरावल रेलवे स्टेशन से मात्र 15 मिनट में ऑटो द्वारा मंदिर पहुँचा जा सकता है।
अहमदाबाद (410 किमी) और राजकोट से गुजरात राज्य परिवहन (GSRTC) की बसें उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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