सती की दाहिनी जांघ (उरु भाग) · माँ पटनेश्वरी सर्वानंदकरी व व्योमकेश भैरव · पाटलिपुत्र
मागधे व्योमकेशश्च सर्वानन्दकरी परा। दक्षिणे चोरुभागे च पटनेश्वरि नमोऽस्तु ते॥
भावार्थ: मगध देश में सती की दाहिनी जांघ गिरी जहाँ सर्वानंदकरी पटनेश्वरी देवी और व्योमकेश भैरव विराजते हैं।
सती का दाहिना उरु भाग गिरने से यह स्थल सर्वानंदकरी पीठ बना। गर्भगृह में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों देवियों की पाषाण प्रतिमाएं एक साथ प्रतिष्ठित हैं।
चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृतांत में इस मंदिर का उल्लेख किया है। सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य ने भी इस नगर-देवी का पूजन किया था।
काले प्रस्तर की तीन भव्य देवियां जो भव्य वस्त्रों, मुकुट और स्वर्ण छत्र से अलंकृत हैं। मंदिर के सम्मुख एक पावन कुण्ड भी है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 05:30 | महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती त्रिदेवी श्रृंगार |
| संध्या महाआरती | सायं 07:30 | सहस्त्र दीप प्रज्वलन व शंखनाद |
धोती-कुर्ता, पायजामा या सादे वस्त्र
साड़ी या सलवार सूट
💡 मंदिर प्रांगण में स्वच्छता का ध्यान रखें।
हजारों दीपों से त्रिदेवी का महाश्रृंगार
अखंड पाठ व शतचंडी महायज्ञ
पटना एयरपोर्ट से कैब या ऑटो द्वारा 35 मिनट में बड़ी पटन देवी पहुँचा जा सकता है।
पटना साहिब रेलवे स्टेशन सबसे निकट है जहाँ से मात्र 10 मिनट में ई-रिक्शा मिलता है।
अशोक राजपथ मार्ग द्वारा पटना के किसी भी कोने से सुलभ वाहन उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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