सती का पृष्ठ भाग (पीठ) · माँ शर्वाणी कन्याकुमारी व निमिष भैरव · त्रिवेणी सागर संगम
कन्याश्रमे च शर्वाणी निमिषो भैरवः स्मृतः। पृष्ठदेशे पपातात्र सागरत्रयसङ्गमे॥
भावार्थ: तीन सागरों के संगम पर स्थित कन्याश्रम में सती का पृष्ठ भाग गिरा, जहाँ शर्वाणी देवी और निमिष भैरव वास करते हैं।
बाणासुर दैत्य का वध केवल एक कुंवारी कन्या द्वारा ही संभव था। भगवान शिव से विवाह न होने पर माता ने आजीवन तपस्विनी रहने का संकल्प लिया और उस दुष्ट असुर का वध किया।
स्वामी विवेकानंद ने 1892 में अमेरिका जाने से पूर्व इसी मंदिर में माता का आशीर्वाद लिया था और समुद्र की शिला पर ध्यान लगाया था। माता की नासिका की दिव्य हीरा नथ इतनी चमकदार है कि प्राचीन काल में समुद्री जहाज उसे प्रकाशस्तंभ समझ लेते थे।
काले ग्रेनाइट प्रस्तर पर उत्कीर्ण चतुर्भुजी कन्या देवी जिनके हाथ में अक्षमाला है और नासिका में सूर्य के समान चमकता दिव्य हीरा लगा है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| निर्मल्य दर्शन | प्रातः 05:00 | दिव्य पुष्प श्रृंगार व अभिषेक |
| दीप आराधना | सायं 06:45 | कपूर व सहस्त्र दीप आरती |
धोती (मुंडू) अनिवार्य, ऊपरी वस्त्र (शर्ट) उतारना नियम है
साड़ी या पारंपरिक सलवार सूट
💡 सागर स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करके ही प्रवेश करें।
10 दिवसीय भव्य उत्सव एवं सागर में सुहासिनी नौका विहार
एक ही समय सूर्य का अस्त और चंद्रमा का उदय का दुर्लभ दृश्य
त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) एयरपोर्ट से 2.5 घंटे में सड़क मार्ग या ट्रेन से कन्याकुमारी पहुंचा जा सकता है।
कन्याकुमारी भारत के सभी प्रमुख नगरों (दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई, बेंगलुरु) से सीधी ट्रेनों द्वारा जुड़ा है।
मदुरै (240 किमी), तिरुनेलवेली (85 किमी) और त्रिवेंद्रम से उत्कृष्ट 4-लेन राजमार्ग उपलब्ध है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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