
51 शक्तिपीठों में नाभि महापीठ · श्रीचक्र पर अधिष्ठित आदि शक्ति
कामाक्षीं करुणापूर्णां कल्पवृक्षस्वरूपिणीम्। कामकोटिपीठनिलयां वन्दे तां लोकमातरम्॥
भावार्थ: करुणा से परिपूर्ण, कल्पवृक्ष स्वरूपा, कामकोटि पीठ में विराजमान जगज्जननी माँ कामाक्षी को मैं वंदन करता हूँ।
सती की नाभि यहाँ गिरी थी। कामाक्षी का अर्थ है "जिनकी आंखें प्रेम और करुणा बरसाती हैं"। माँ यहाँ पद्मासन मुद्रा में धनुष, बाण, पाश और अंकुश धारण किए हुए हैं।
कांची कामकोटि पीठम के साथ सम्बद्ध। कांची नगरी के अन्य किसी भी शिव मंदिर में अलग से देवी का मंदिर नहीं है, क्योंकि सभी का केंद्र माँ कामाक्षी ही हैं।
गर्भगृह के ऊपर स्थित स्वर्ण विमान, गायत्री मंडप और आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिष्ठित चमत्कारी श्री चक्र यंत्र।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| उषःकाल पूजा | प्रातः 05:30 - 06:15 | गोपूजा एवं मंगल आरती |
| कालसन्धि पूजा | प्रातः 08:30 - 09:15 | श्रीचक्र नित्य पूजा |
| सायराक्षै पूजा | सायं 06:00 - 07:00 | संध्या महाआरती |
| अर्थजाम पूजा | रात्रि 08:15 - 08:45 | शयन आरती |
धोती और उत्तरीय।
साड़ी या सलवार (दुपट्टे सहित)। पश्चिमी वस्त्र वर्जित।
💡 श्री चक्र के सम्मुख शांति व पवित्रता बनाए रखें।
10 दिवसीय विशाल रथ व नौका उत्सव
नवदिवसीय श्रीविद्या महापूजन
चेन्नई एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा 1.5 घंटे में कांचीपुरम पहुंचा जा सकता है।
चेन्नई व बेंगलुरु से सीधी ट्रेनें व उपनगरीय सेवाएं उपलब्ध हैं।
चेन्नई से 75 किमी (बेंगलुरु हाईवे NH-48), बसें हर 10 मिनट में उपलब्ध।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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