51 शक्तिपीठों में दिव्य जिह्वा पीठ · 9 अखंड ज्योतियां · पावन सेज भवन एवं शयन आरती
ज्वालामुखी महादेवि सर्वकामप्रदायिनी। नमस्ते वरदे देवि पाहि मां भवसागरात्॥
भावार्थ: समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली, वरदायिनी माँ ज्वालामुखी देवी! आपको नमस्कार है, भवसागर से मेरी रक्षा करें।
माँ सती की पावन जिह्वा यहाँ गिरी थी। यहाँ नौ ज्योतियां—महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, अंबा और अंजनी रूप में पूजी जाती हैं। ज्वाला देवी चालीसा में कहा गया है: 'सेज भवन के दर्शन पाऊं, बार-बार मैं शीश नवाऊं।' रात्रि में माँ ज्वालाजी शयन हेतु 'सेज भवन' में पधारती हैं, जहाँ चांदी के पलंग पर चौपड़ रखी जाती है और आदि शंकराचार्य रचित सौंदर्य लहरी का गान होता है।
मुगल बादशाह अकबर ने ज्योतियों को बुझाने के लिए नहर का पानी छोड़ा और लोहे के तवे रखवाए, किंतु ज्योतियां नहीं बुझीं। तब अकबर ने नंगे पैर आकर सवा मन सोने का छत्र अर्पित किया, जो आज भी मंदिर में दर्शनीय है।
बिना तेल-बाती के निरंतर प्रज्वलित नीली-पीली प्राकृतिक ज्योतियां एवं मंदिर का अलौकिक 'सेज भवन'। सेज भवन में माँ का चांदी का पलंग, मखमली बिस्तर, चौपड़ (पासे) और सुगंधित पान सजाया जाता है। अगली सुबह जब मंगला आरती में कपाट खुलते हैं, तो चादर पर सिलवटें और चौपड़ के पासे हिले हुए मिलते हैं—जो माँ की प्रत्यक्ष उपस्थिति का सजीव चमत्कार है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 05:00 - 05:30 | प्रथम आरती: मालपुआ, मिश्री व माखन भोग। सेज भवन के कपाट खुलते हैं और रात्रि शयन के दर्शन होते हैं। |
| सूर्यमुखी (पंचोपचार) आरती | प्रातः 08:00 - 08:30 | द्वितीय आरती: पीले मीठे केसरिया भात का भोग। |
| मध्याह्न (राजभोग) आरती | दोपहर 11:30 - 12:30 | तृतीय आरती: दाल, चावल, हलवा, सब्जी व शुद्ध देशी घी का राजभोग। |
| संध्या आरती | सायं 07:00 - 07:45 | चतुर्थ आरती: पूरी-चना भोग एवं ताजे सुगंधित पुष्पों से दिव्य ज्योतियों का भव्य श्रृंगार। |
| शयन एवं सेज भवन आरती | रात्रि 09:30 - 10:30 | पंचम महाआरती: गर्भगृह के बाद गाजे-बाजे से माँ 'सेज भवन' पधारती हैं। सौंदर्य लहरी पाठ, चांदी की सेज पर 16 श्रृंगार, पान व चौपड़ अर्पण। |
शालीन पारंपरिक वस्त्र।
साड़ी या सलवार-कुर्ता।
💡 ज्योतियों को सीधे स्पर्श करना वर्जित है। सेज भवन के शयन दर्शन के समय पूर्ण शांति बनाए रखें।
9 दिन का विशाल मेला एवं अखंड शतचंडी महायज्ञ
लाखों भक्तों द्वारा लाल ध्वजा एवं सेज भवन दर्शन
गग्गल (धर्मशाला) एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा 1.5 घंटे में ज्वालामुखी पहुँचा जा सकता है।
पठानकोट रेलवे स्टेशन से कांगड़ा टॉय ट्रेन या बस/टैक्सी द्वारा 3 घंटे में यात्रा।
धर्मशाला (55 किमी), कांगड़ा (35 किमी) और चंडीगढ़ (200 किमी) से सीधी बसें।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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