सती के दोनों घुटने (जानु भाग) · माँ गुह्येश्वरी व कपाल भैरव · पावन बागमती तट
नेपाले जानुयुग्मं च गुह्येश्वरी महेश्वरी। कपालभैरवो यत्र पशुपतिसमीपतः॥
भावार्थ: नेपाल में पशुपतिनाथ के समीप सती के दोनों घुटने गिरे जहाँ गुह्येश्वरी देवी और कपाल भैरव निवास करते हैं।
सती के जानु (घुटने) यहाँ गुप्त रूप से गिरे, जिससे देवी को "गुह्येश्वरी" (गुप्त रहस्यमयी ईश्वरी) कहा गया। यहाँ तांत्रिक साधना की सर्वोच्च पीठ है।
नेपाल में पशुपतिनाथ महादेव और गुह्येश्वरी शक्तिपीठ को शिव-शक्ति का युगल स्वरूप माना जाता है। पशुपतिनाथ के दर्शन गुह्येश्वरी के दर्शन के बिना अपूर्ण माने जाते हैं।
मंदिर के गर्भगृह में कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक चांदी से मढ़ा हुआ पावन भूमिगत कलश (कुण्ड) है जो निरंतर जलमग्न रहता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| नित्य महापूजा | प्रातः 06:00 | पावन कलश जल अभिषेक व सिंदूर अर्पण |
| संध्या आरती | सायं 06:30 | पारंपरिक नेवारी वाद्य व दीपदान |
धोती-कुर्ता या सादे शालीन वस्त्र
साड़ी या सलवार सूट
💡 चमड़े की कोई भी वस्तु मुख्य द्वार पर ही जमा करा दें।
काठमांडू में पावन कलश की भव्य नगर परिक्रमा
हजारों तांत्रिकों व साधकों का संगम
काठमांडू एयरपोर्ट से मात्र 10 मिनट में टैक्सी द्वारा पशुपतिनाथ व गुह्येश्वरी पहुंचा जा सकता है।
भारत से गोरखपुर या रक्सौल तक ट्रेन द्वारा आकर वहाँ से सड़क मार्ग द्वारा काठमांडू पहुंचा जाता है।
गोरखपुर (सोनौली सीमा) या रक्सौल (बीरगंज) से सीधी डीलक्स बसें काठमांडू जाती हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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