सती के पावन चरण · माँ छिन्नमस्तिका चिंतपूर्णी व रुद्र भैरव · कांगड़ा घाटी
चिन्तापूर्णे महामाये चिन्तितार्थप्रदायिनि। नमस्ते चण्डिके देवि सर्वकल्याणहेतवे॥
भावार्थ: हे चिंतपूर्णी महामाये! मनोवांछित फल प्रदान करने वाली माँ चंडिके! आपको नमस्कार है।
दक्ष यज्ञ के उपरांत सती के पावन चरण यहाँ गिरे। तंत्र शास्त्र में यह देवी छिन्नमस्तिका के रूप में पूजित हैं जो अहंकार का नाश कर आत्मज्ञान प्रदान करती हैं।
माँ के परम भक्त माई दास को यहाँ छिन्नमस्तिका रूप में साक्षात दर्शन हुए थे। मंदिर के प्रांगण में स्थित वटवृक्ष पर कलावा बांधकर मन्नत मांगने की प्राचीन परंपरा है।
गर्भगृह में गोल पावन पिंडी स्वरूप प्रतिष्ठित है जिसके चारों ओर चांदी का अलौकिक आवरण और छत्र सुशोभित है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| प्रातः महाआरती | प्रातः 05:00 | चरण प्रक्षालन व दिव्य भोग |
| संध्या आरती | सायं 07:30 | कपूर ज्योति व दुर्गा सप्तशती पाठ |
धोती-कुर्ता या सादे शालीन वस्त्र
साड़ी या सलवार सूट
💡 मंदिर के पवित्र वटवृक्ष की परिक्रमा श्रद्धापूर्वक करें।
उत्तरी भारत का विशालतम शक्तिपीठ मेला
नौ दिनों तक अनवरत भजन-संकीर्तन व महायज्ञ
धर्मशाला (कांगड़ा) या चंडीगढ़ एयरपोर्ट से कैब द्वारा 1.5 से 3 घंटे में पहुँचा जा सकता है।
नई दिल्ली से चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस सीधे अंब अंदौरा स्टेशन तक आती है, जहाँ से 25 मिनट में मंदिर पहुंचा जाता है।
चंडीगढ़, जालंधर, होशियारपुर और धर्मशाला से उत्कृष्ट सड़क संपर्क व निरंतर बसें उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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