51 शक्तिपीठों में प्रचंड चंडिका शक्तिपीठ · भैरवी-दामोदर संगम
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्रवैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा॥
भावार्थ: हे वज्रवैरोचनी माँ छिन्नमस्तिका! समस्त बंधनों को काटकर मुझे आत्मज्ञान प्रदान करो।
जब माता की सहचरी जया और विजया भूख से व्याकुल हो उठीं, तब करुणामयी माँ ने अपना शीश काटकर अपनी ही रक्तधारा से उनकी क्षुधा शांत की। यह आत्म-बलिदान और परम त्याग का प्रतीक है।
दशमहाविद्याओं में छठवीं महाविद्या। यह पीठ कामाख्या के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा तांत्रिक सिद्धपीठ माना जाता है।
अष्टकोणीय मंदिर। प्राकृतिक जलप्रपात और दो नदियों के संगम के मध्य स्थित यह शिला अद्वितीय प्राकृतिक ऊर्जा का केंद्र है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 05:30 - 06:15 | प्रातः आरती |
| संध्या आरती | सायं 06:30 - 07:15 | दीप महाआरती |
| शयन आरती | रात्रि 08:00 - 08:30 | शयन |
धोती-कुर्ता या सात्विक वस्त्र।
साड़ी या सलवार-सूट।
💡 संगम स्नान के समय नदी के तेज बहाव से सावधान रहें।
अखंड तांत्रिक महापूजन
संगम में लाखों श्रद्धालुओं का पावन स्नान
रांची एयरपोर्ट से टैक्सी द्वारा 1.5 घंटे में रजरप्पा पहुँच सकते हैं।
रामगढ़ व रांची से सड़क मार्ग द्वारा सीधी टैक्सियां उपलब्ध।
रांची-पटना राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
माँ छिन्नमस्तिका मंदिर (रजरप्पा) पूजा किट देखें🔱 माँ छिन्नमस्तिका मंदिर (रजरप्पा) दर्शन / पूजा हेतु पंडित बुक करें