सती का भ्रू-मध्य (दोनों भौंहों के बीच का भाग) · माँ महिषमर्दिनी व वक्रनाथ भैरव · सप्त उष्ण कुंड
मनसो मनसा देवी वक्रनाथश्च भैरवः। भ्रूमध्ये च स्थिता देवी सर्वसिद्धिप्रदायिनी॥
भावार्थ: बक्रेश्वर में भ्रू-मध्य भाग गिरा जहाँ महिषमर्दिनी देवी और वक्रनाथ भैरव सर्वसिद्धि प्रदान करते हैं।
सती का आज्ञा चक्र यहाँ गिरने से यह शक्तिपीठ योग और कुंडलिनी जागरण का परम केंद्र माना जाता है।
अष्टावक्र मुनि ने अपने आठ अंगों के वक्रता दोष से मुक्ति पाने हेतु यहाँ भगवान शिव की घोर तपस्या की थी, जिससे शिवजी का नाम "वक्रनाथ" पड़ा। यहाँ के गंधक जल में स्नान करने से चर्म रोग और वात रोग दूर होते हैं।
अग्नि कुंड, सूर्य कुंड, ब्रह्म कुंड, श्वेतगंगा आदि 7 गर्म जल कुंड जहाँ से प्राकृतिक गर्म भाप निकलती है, और समीप ही माँ महिषमर्दिनी व वक्रनाथ महादेव का प्राचीन मंदिर।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| मंगला आरती | प्रातः 06:00 | वक्रनाथ शिव व महिषमर्दिनी अभिषेक |
| संध्या आरती | सायं 07:00 | पारंपरिक ढाक वादन व दीपदान |
धोती-कुर्ता या सादे वस्त्र
साड़ी या सलवार सूट
💡 गर्म जल कुंडों में सावधानी से उतरें, तापमान अधिक होता है।
लाखों श्रद्धालुओं का गर्म कुंड स्नान व अनवरत जलाभिषेक
अष्टभुजी महिषमर्दिनी का विशेष महापूजन
अंदाल एयरपोर्ट से 1 घंटे में कैब द्वारा बक्रेश्वर पहुँचा जा सकता है।
हावड़ा से सूरी या बोलपुर स्टेशन के लिए कई ट्रेनें हैं, जहाँ से बस या टैक्सी उपलब्ध है।
सूरी (18 किमी), बोलपुर (45 किमी) और दुर्गापुर (65 किमी) से नियमित बस सेवा उपलब्ध है।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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