सती की बायीं भुजा (वाम बाहु) · माँ बहुला व भीरुक भैरव · अजय नदी तट
बाहुले वामबाहुश्च बहुला भीरुको हरः। सर्वसमृद्धिदात्री सा भक्तानां वरदा शुभा॥
भावार्थ: बहुला में बायीं भुजा गिरी जहाँ बहुला देवी और भीरुक भैरव समस्त समृद्धि और निर्भयता प्रदान करते हैं।
सती की वाम बाहु के पतन से इस क्षेत्र को शक्ति और भय-मुक्ति का वरदान मिला।
चैतन्य महाप्रभु की लीलाभूमि कटवा के समीप स्थित यह पीठ तांत्रिक और वैष्णव दोनों धाराओं का संगम है। "भीरुक" भैरव का अर्थ है जो भय से मुक्त करे।
हरे-भरे ग्रामीण प्रांगण में स्थित शांत मंदिर जिसके गर्भगृह में माँ बहुला और भगवान कार्तिक-गणेश के विग्रह प्रतिष्ठित हैं।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| नित्य महापूजा | प्रातः 06:30 | वाम बाहु शिला अभिषेक |
| संध्या आरती | सायं 06:30 | शंखनाद व दीप आराधना |
धोती-कुर्ता या सादे परिधान
साड़ी या सलवार सूट
💡 मंदिर की ग्रामीण पवित्रता का सम्मान करें।
अखंड पाठ व महाभोग वितरण
अजय नदी स्नान व वार्षिक उत्सव
कोलकाता या अंदाल से ट्रेन द्वारा कटवा जंक्शन पहुँचा जाता है।
हावड़ा और सियालदह से कटवा जंक्शन के लिए सीधी ईएमयू व एक्सप्रेस ट्रेनें हैं। कटवा से बस/ऑटो 30 मिनट।
बर्धमान शहर (55 किमी) और बोलपुर (40 किमी) से सीधी बस सेवाएं हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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