
सती का अधर (निचला होंठ) · माँ फुल्लरा व विश्वेश भैरव · अटूट हास्य पीठ
अट्टहासे चोष्ठपातो देवी फुल्लरा प्रकीर्तिता। विश्वेशो भैरवस्तत्र भक्तानामभयप्रदः॥
भावार्थ: अट्टहास में सती का अधर गिरा जहाँ फुल्लरा देवी और विश्वेश भैरव भक्तों को अभय प्रदान करते हैं।
महादेव के भयंकर अट्टहास के साथ सती का अधर यहाँ गिरा, अतः इसे "अट्टहास पीठ" कहा जाता है। यहाँ माता सदैव मंद-मंद मुस्कुराते हुए भक्तों को अभय देती हैं।
महान बंगाली उपन्यासकार ताराशंकर बंद्योपाध्याय की जन्मस्थली के समीप स्थित यह पीठ गहन साधना का स्थल रहा है। मंदिर के समीप एक पवित्र सरोवर है जिसके बारे में मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने दुर्गा पूजा हेतु 108 नीलकमल इसी सरोवर से लिए थे।
गर्भगृह में 15 फीट ऊंचा एक प्राकृतिक पाषाण खंड है जिसके ऊपर माता का कोई निर्मित विग्रह न होकर एक विशाल शैल शिला पूजी जाती है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| नित्य प्रातः आरती | प्रातः 06:30 | शिला प्रक्षालन व पुष्प अर्पण |
| संध्या आरती | सायं 06:45 | पारंपरिक धूप व शंखनाद |
धोती-कुर्ता या सादे परिधान
साड़ी या सलवार सूट
💡 सरोवर की पवित्रता बनाए रखें।
10 दिवसीय विशाल ग्रामीण संस्कृति व भक्ति मेला
108 नीलकमल अर्पण महायज्ञ
कोलकाता एयरपोर्ट से ट्रेन द्वारा बोलपुर या अहमदपुर होते हुए लाभपुर पहुंचा जा सकता है।
अहमदपुर जंक्शन या बोलपुर शांतिनिकेतन (30 किमी) से ऑटो/बस द्वारा 40 मिनट में मंदिर पहुँचा जाता है।
बोलपुर, सिउड़ी और तारापीठ से लाभपुर के लिए सीधी बसें उपलब्ध हैं।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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