सती का पावन कंठ भाग · महामाया शक्ति एवं त्रिसंध्येश्वर भैरव · हिमालय
कण्ठं पातु महामाया त्रिसंध्येशश्च भैरवः। अमरेषे स्थिता देवी सर्वकामफलप्रदा॥
भावार्थ: अमरनाथ पर्वत पर स्थित महामाया देवी और त्रिसंध्येश्वर भैरव समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं।
जब भगवान विष्णु के चक्र से सती का कंठ भाग कटकर अमरनाथ पर्वत पर गिरा, तब संपूर्ण हिमालय दिव्य ऊर्जा से आच्छादित हो गया।
यहीं भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व की अमर कथा सुनाई थी। आदि शंकराचार्य एवं ऋषि कश्यप द्वारा पूजित यह तीर्थ सनातन की परम ऊर्जा का स्रोत है।
3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित प्राकृतिक हिम गुफा जहाँ प्रतिवर्ष श्रावण में प्राकृतिक हिमलिंग और शक्ति पिंडी का निर्माण होता है।
| आरती का नाम | सटीक समय | महत्व व अनुष्ठान |
|---|---|---|
| प्रातः महाआरती | प्रातः 06:00 | हिमलिंग व महामाया पिंडी पर पंचामृत व कपूर वंदन |
| संध्या आरती | सायं 05:30 | पवित्र गुफा में धूप व शंखनाद |
गर्म ऊनी वस्त्र, थर्मल अंतःवस्त्र, ट्रैकिंग जूते
गर्म सलवार सूट या ट्रैकिंग सूट, शॉल
💡 शारीरिक स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और यात्रा पंजीकरण अनिवार्य है।
रक्षाबंधन पर छड़ी मुबारक की पावन प्रतिष्ठा
श्रीनगर एयरपोर्ट से पहलगाम या बालटाल तक टैक्सी, वहाँ से हेलीकॉप्टर या पैदल यात्रा।
जम्मू तवी स्टेशन से पहलगाम तक बस या टैक्सी द्वारा यात्रा।
श्रीनगर से पहलगाम (90 किमी) या बालटाल (95 किमी) होकर यात्रा मार्ग।
100% सात्विक, गंगाजल अभिमंत्रित, संपूर्ण विधि पुस्तिका सहित घर पहुँचाई जाती है।
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