“नए घर में स्थायी सुख, शांति, समृद्धि और वास्तु दोष निवारण हेतु शास्त्रसम्मत पद्धति”
घर केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि परिवार का आध्यात्मिक मंदिर होता है। गृह प्रवेश के समय वास्तु देव की शांति, दसों दिशाओं के दिक्पालों का पूजन और नवग्रह हवन करने से निर्माण के समय की अशुद्धियां और नकारात्मक तरंगें दूर हो जाती हैं।
जीवनभर की गाढ़ी कमाई से बने आशियाने में सपरिवार मंगल प्रवेश करने से बच्चों में सनातन संस्कारों की गहरी छाप पड़ती है और परिवार में कलह-विवाद नहीं होता।
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घर पर स्वयं करने हेतु सरल एवं प्रमाणिक विधि
मुख्य द्वार की दोनों चौखटों पर हल्दी, रोली और अक्षत से स्वास्तिक बनाएं। देहरी पर गंगाजल छिड़ककर पुष्प अर्पित करें। तोरण की पूजा करें।
ॐ द्वारपालकाय नमः। ॐ देहलीदेव्यै नमः। शुभं भवतु कल्याणं आरोग्यं धनसम्पदाम्॥
सरल अर्थ: द्वारपालों और देहली देवी को मेरा नमन। इस घर में सदा कल्याण, आरोग्य और धन-सम्पत्ति का वास हो।
गृहस्वामिनी सिर पर मंगल कलश (गंगाजल, आम के पत्ते और नारियल युक्त) रखकर आगे चलें। गृहस्वामी शंख या घंटी बजाते हुए पीछे चलें। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में कलश स्थापित करें।
ॐ प्रविश नगरीं कीजै सब काजा। हृदयं राखि कोसलपुर राजा॥
सरल अर्थ: प्रभु श्री रामचन्द्र जी को हृदय में धारण कर सब कार्य सिद्ध करने हेतु इस नवीन गृह में प्रवेश करें।
रसोई के चूल्हे पर स्वास्तिक बनाएं। नए पात्र में गाय का कच्चा दूध चढ़ाएं और उसे इस प्रकार उबलने दें कि दूध पात्र से बाहर की ओर गिरे (यह समृद्धि के उफान का प्रतीक है)। उस दूध से खीर बनाकर भोग लगाएं।
ॐ अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥
सरल अर्थ: हे माँ अन्नपूर्णा! आप सदा परिपूर्ण हैं, हमारे इस घर के भंडार को सदा अन्न और ज्ञान से भरपूर रखें।
घर के मध्य (ब्रह्मस्थान) में चौकी पर वास्तु यंत्र स्थापित करें। वास्तु पुरुष को प्रणाम कर क्षमा याचना करें कि निर्माण के दौरान भूमि खनन से जो भी दोष हुए हों, वे शांत हों।
नमस्ते वास्तु पुरुषाय भूशय्याभिरत प्रभो। मद्गृहं धनधान्यादिसमृद्धं कुरु सर्वदा॥
सरल अर्थ: हे भूमि पर शयन करने वाले वास्तु पुरुष! आपको प्रणाम। मेरे इस घर को सदा धन-धान्य और संतानों से समृद्ध रखें।
हवन कुण्ड में आम की समिधा सजाकर अग्नि प्रज्वलित करें। गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और वास्तु गायत्री से 108 आहुतियां दें। अंत में श्रीफल से पूर्णाहुति दें।
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
सरल अर्थ: वह परब्रह्म पूर्ण है, यह जगत भी पूर्ण है। पूर्ण में से पूर्ण निकालने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है।
पूजन कराने वाले विद्वान पुरोहित को आदरपूर्वक भोजन कराएं और वस्त्र-दक्षिणा दें। गाय को पहली रोटी (गुड़ सहित) खिलाएं और परिवार के वरिष्ठों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
ॐ गावो ममाग्रतो सन्तु गावो मे सन्तु पृष्ठतः। गावो मे हृदये सन्तु गवां मध्ये वसाम्यहम्॥
सरल अर्थ: गौ-माता मेरे आगे हों, पीछे हों, मेरे हृदय में हों। मैं सदा गौ-माता के सान्निध्य में वास करूँ।
ॐ वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान् त्स्वावेशो अनमीवो भवा नः। यत् त्वेमहे प्रतितन्नो जुषस्व शं नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे॥
अर्थ: हे वास्तुदेव! हमें अपना आश्रय दें, हमारे घर को रोगमुक्त रखें। हमारे दो पैरों वाले (मनुष्य) और चार पैरों वाले (पशु) सबका कल्याण करें।
लाभ: घर के समस्त वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जा का समूल निवारण।
कुल 6 वस्तुएं
काशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन अथवा घर पर आकर शास्त्रसम्मत पूजन संपन्न कराया जाएगा।
पंडित सेवा बुक करेंनए घर में दाहिना पैर पहले रखकर प्रवेश, मंगल कलश यात्रा, वास्तु शांति, नवग्रह हवन और गौ-माता के पूजन की संपूर्ण शास्त्रीय पद्धति।
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