“नए आवास में सुख, शांति, लक्ष्मी और आरोग्य के स्थायी वास हेतु गृह प्रवेश अनुष्ठान”
नए घर में दाहिना पैर पहले रखकर प्रवेश, मंगल कलश यात्रा, वास्तु शांति, नवग्रह हवन और गौ-माता के पूजन की संपूर्ण शास्त्रीय पद्धति।
भूमि और भवन निर्माण के समय उत्पन्न वास्तु दोषों के निवारण और दसों दिशाओं के दिक्पालों को तृप्त कर घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए गृह प्रवेश आवश्यक है।
मत्स्य पुराण के वास्तु पुरुष आख्यान के अनुसार वास्तु देव के शरीर पर समस्त तैंतीस कोटि देवता स्थित हैं। वास्तु शांति से घर का हर कोना अभिमंत्रित हो जाता है।
द्वार पर तोरण (आम के पत्ते व गेंदा फूल) और स्वास्तिक लगाना
दम्पति द्वारा सिर पर मंगल कलश रखकर दायीं ओर से प्रवेश
रसोई में नवीन पात्र में दूध उफनवाना (समृद्धि का प्रतीक)
गणेश पूजन, वास्तु शांति और नवग्रह मण्डल हवन
गौ-माता को ग्रास और विप्र जनों को भोजन व दक्षिणा
सूर्य के उत्तरायण काल में और शुभ नक्षत्रों (रोहिणी, मृगशिरा, उत्तराफाल्गुनी) में प्रवेश अति उत्तम है।
आज का पंचांग देखेंकाशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन वीडियो कॉल अथवा संकल्प पूजा का शास्त्रीय प्रबंध।
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