“यमराज और माँ यमुना के अमर भ्रातृ-स्नेह की पावन स्मृति, भाइयों की अकाल मृत्यु से रक्षा का पर्व”
कार्तिक शुक्ल द्वितीया का पावन पर्व, जिसमें बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर, गोला (सूखा नारियल) भेंट कर उनकी दीर्घायु, स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना करती हैं।
पद्म पुराण एवं स्कंद पुराण के अनुसार, जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथ से बना सात्विक भोजन ग्रहण करता है और तिलक लगवाता है, उसे यमराज के भय और नरक यातना से मुक्ति मिल जाती है।
सूर्य पुत्र धर्मराज यमराज को उनकी बहन यमुना ने अनेक बार अपने घर भोजन के लिए निमंत्रित किया। कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज अपनी बहन के घर पहुंचे। यमुना ने आदरपूर्वक उनका पूजन किया और स्वादिष्ट भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान मांगने को कहा, तो यमुना ने मांगा कि जो भाई आज के दिन अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करे, उसे यमलोक की यातना न भोगनी पड़े।
बहन द्वारा पूजा की थाली में कुमकुम, अक्षत, कलावा, सूखा गोला (नारियल) और मिष्ठान्न सजाना
भाई को पाटे (आसन) पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाना
दाहिने हाथ की अनामिका उंगली से भाई के माथे पर तिलक लगाना और अक्षत लगाना
कलाई पर रक्षासूत्र बांधना और सूखा नारियल भेंट करना
भाई को अपने हाथों से बना सात्विक भोजन खिलाना और भाई द्वारा बहन को चरण स्पर्श कर उपहार देना
दोपहर में अभिजीत मुहूर्त अथवा विजय मुहूर्त में भाई को तिलक लगाना और भोजन कराना अति शुभ माना गया है।
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