
“धन, धान्य, ऐश्वर्य, बुद्धि एवं सुख-शांति की प्राप्ति हेतु दीपावली प्रदोष काल पूजन”
कार्तिक कृष्ण अमावस्या की पावन निशा में समुद्र मंथन से प्रकट हुईं माँ महालक्ष्मी भूलोक पर साक्षात विचरण करती हैं। इस दिन श्री गणेश के साथ माँ लक्ष्मी और धनाध्यक्ष कुबेर का षोडशोपचार पूजन करने से घर में स्थायी धन-धान्य और कीर्ति की वृद्धि होती है।
पारिवारिक एकता का यह सबसे बड़ा पर्व है। बच्चों को बही-खाता पूजन, स्वास्तिक निर्माण और दीप जलाने की वैदिक विधि सिखाने का यह स्वर्णिम अवसर है।
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घर पर स्वयं करने हेतु सरल एवं प्रमाणिक विधि
कुश के आसन पर बैठकर तीन बार आचमन करें। हाथ धोकर एक बड़ा अखंड दीपक गाय के घी का जलाएं जो रातभर प्रज्वलित रहे।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥ दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
सरल अर्थ: परमात्मा का स्मरण कर मैं भीतर-बाहर से शुद्ध होता हूँ। दीपक की दिव्य ज्योति परब्रह्म का स्वरूप है, जो मेरे अज्ञान व पापों को हरती है।
चौकी पर अक्षत की ढेरी पर तांबे या पीतल का कलश रखें। उसमें गंगाजल, सुपारी, कौड़ी, हल्दी की गांठ, सिक्का डालें। कलश के मुख पर 5 आम के पत्ते लगाकर उस पर अक्षत से भरा पूर्णपात्र और नारियल स्थापित करें।
कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः। मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥
सरल अर्थ: कलश के मुख में विष्णु, कंठ में शिव, मूल में ब्रह्मा और मध्य में समस्त मातृकाएं वास करती हैं।
गणेश जी को गंगाजल से स्नान कराएं। सिंदूर, जनेऊ, दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प अर्पित करें। "ॐ गं गणपतये नमः" का 21 बार जप करें।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
सरल अर्थ: करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी, विशालकाय, वक्रतुण्ड गणेश जी मेरे समस्त कार्यों को निर्विघ्न संपन्न करें।
माँ लक्ष्मी की प्रतिमा को पंचामृत से प्रतीकात्मक स्नान कराएं। लाल चुनरी ओढ़ाएं। रोली, अक्षत, इत्र, चन्दन, कमलगट्टे, पीली कौड़ियां और कमल का पुष्प उनके श्रीचरणों में अर्पित करें।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
सरल अर्थ: कमल पर विराजमान, परम ऐश्वर्य दायिनी माँ महालक्ष्मी मुझ पर प्रसन्न हों और अपनी कृपा दृष्टि बरसाएं।
तिजोरी, गल्ला, बहीखाता या लैपटॉप पर रोली से ॐ और स्वास्तिक बनाएं। कुबेर यंत्र पर अक्षत, धनिया और सिक्के अर्पित कर प्रार्थना करें।
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
सरल अर्थ: धन-धान्य के स्वामी यक्षराज कुबेर को मेरा प्रणाम। वे हमारे घर और व्यवसाय में धन-धान्य की समृद्धि प्रदान करें।
सपरिवार मिलकर "ॐ जय लक्ष्मी माता" और "जय गणेश देवा" की आरती गाएं। इसके पश्चात थाली में सजे 21 दीपकों को घर की चौखट, मुंडेर, रसोई, तुलसी क्यारी और मुख्य द्वार पर रखें।
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
सरल अर्थ: हे माँ लक्ष्मी! आपकी सदा जय हो। त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश नित्य आपकी सेवा करते हैं।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ॥
अर्थ: तीनों लोकों की स्वामिनी महालक्ष्मी! हमारे दरिद्र का नाश कर विपुल धन और ऐश्वर्य प्रदान करें।
लाभ: दीपावली की रात्रि कमलगट्टे की माला से 108 बार जप करने से स्थायी लक्ष्मी का वास होता है।
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
अर्थ: हे अग्निदेव! सुवर्ण के समान कान्ति वाली, स्वर्ण-रजत माला धारण करने वाली, चन्द्रमा के समान शीतल लक्ष्मी का मेरे घर में आवाहन करें।
लाभ: ऋग्वैदिक श्री सूक्त का पाठ समस्त दरिद्रता और दुर्भाग्य को भस्म कर देता है।
कुल 8 वस्तुएं
काशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन अथवा घर पर आकर शास्त्रसम्मत पूजन संपन्न कराया जाएगा।
पंडित सेवा बुक करेंसनातन धर्म का सर्वाधिक भव्य प्रकाशपर्व, जिसमें माँ महालक्ष्मी और बुद्धिदाता श्री गणेश का विधिवत पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
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