सत्य ही नारायण हैं: कलियुग का सर्वोत्तम अनुष्ठान
सत्यनारायण कथा यह सिखाती है कि जीवन में कभी भी सत्य का त्याग नहीं करना चाहिए और ईश्वर के दिए गए प्रसाद का कभी निरादर नहीं करना चाहिए।---
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कलियुग में सबसे सरल, सुलभ और तुरंत फल देने वाली भगवान सत्यनारायण की पावन आराधना

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प्रसाद में गेहूं के आटे को देशी घी में भूनकर उसमें शर्करा (बूरा), केले के टुकड़े, पंचमेवा और तुलसी दल मिलाया जाता है। इसे सवाया (1.25 गुना) प्रमाण में बनाया जाता है।
सत्यनारायण कथा प्रत्येक मास की पूर्णिमा, संक्रान्ति, गुरुवार अथवा घर में किसी भी नए कार्य, मुंडन, विवाह या जन्मदिन के अवसर पर कराई जा सकती है।