गृह प्रवेश: ईंट-पत्थर के मकान को देव मंदिर बनाने का संस्कार
मत्स्य पुराण के अनुसार भूमि खनन और निर्माण के समय जो भी सूक्ष्म जीव या वास्तु पुरुष को कष्ट पहुंचता है, गृह प्रवेश के समय क्षमा याचना और वास्तु शांति से वे समस्त दोष शांत हो जाते हैं।---
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नए आवास में सुख, शांति, आरोग्य और लक्ष्मी के स्थायी निवास हेतु शास्त्रसम्मत गृह प्रवेश

चरण-दर-चरण विधि, संस्कृत मंत्र, सस्वर उच्चारण ऑडियो और 100% अभिमंत्रित सामग्री किट आपके द्वार।
नए घर की रसोई में नवीन पात्र में कच्चा दूध चढ़ाया जाता है और उसे पात्र से बाहर गिरने तक उबाला जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि इस घर में अन्न, धन और समृद्धि का भंडार सदा इसी प्रकार उफनता रहेगा।
गृह प्रवेश की प्रथम रात्रि घर के स्वामियों को उसी घर में शयन करना चाहिए। घर को कभी भी पूजा के बाद खाली या ताला लगाकर नहीं छोड़ना चाहिए।