कार्तिक अमावस्या की रात्रि समुद्र मंथन से प्रकट हुईं माँ महालक्ष्मी भूलोक पर विचरण करती हैं। जानें चौकी सजाने से लेकर, कुबेर यंत्र प्रतिष्ठा, कमलगट्टे की माला से 108 मंत्र जप और घर के 21 कोनों में दीपक रखने की शास्त्रीय विधि।
दीपावली महालक्ष्मी पूजन: तमसो मा ज्योतिर्गमय
दीपावली केवल दीपों का त्योहार नहीं, बल्कि अज्ञान के अंधकार पर ज्ञान और दरिद्रता पर ईश्वरीय ऐश्वर्य की विजय का महापर्व है। स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या की पावन संध्या में माँ महालक्ष्मी स्वयं अपने भक्तों के घरों में प्रवेश करती हैं।
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#दीपावली षोडशोपचार पूजन के मुख्य अंग:
1. **चौकी स्थापना**: उत्तर या ईशान कोण में लकड़ी की चौकी पर लाल रेशमी वस्त्र बिछाएं।
2. **कलश स्थापना**: तांबे के कलश में गंगाजल, सुपारी, कौड़ी, सिक्का और आम्रपल्लव लगाकर नारियल रखें।
3. **लक्ष्मी-गणेश अभिषेक**: शुद्ध पंचामृत और गंगाजल से विग्रहों को स्नान कराएं।
4. **अष्ट लक्ष्मी आवाहन**: कमलगट्टे, पीली कौड़ियां और गोमती चक्र माँ के श्रीचरणों में अर्पित करें।
5. **कुबेर व बही-खाता पूजन**: तिजोरी और व्यापारिक खातों पर स्वास्तिक अंकित कर कुबेर मंत्र का उच्चारण करें।
6. **श्री सूक्त एवं कनकधारा स्तोत्र**: ऋग्वैदिक श्री सूक्त का सस्वर पाठ कर अंत में कर्पूर महाआरती करें।
सीधे पूजा आरम्भ करेंदीपावली महालक्ष्मी-गणेश पूजन विधि
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