
“प्रातः व सायं आत्म-तेज जाग्रति, मानसिक एकाग्रता एवं घर में शांति हेतु नित्य साधना”
सनातन धर्म में संध्या वंदन को द्विज और प्रत्येक सनातनी का नित्य कर्म माना गया है। दिन और रात के मिलन के समय (संधिकाल) में मन की वृत्तियां सहज ही शांत होती हैं। इस समय आचमन, प्राणायाम, दीप प्रज्वलन और गायत्री जप करने से बुद्धि का विकास, ओज-तेज की वृद्धि और घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश रुकता है।
आज के तनावपूर्ण और डिजिटल युग में 15 मिनट की दैनिक संध्या वंदन मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और आंतरिक शांति के लिए सबसे वैज्ञानिक ध्यान पद्धति है। बच्चों को यह बचपन से सिखाने पर उनकी स्मरण शक्ति तीव्र होती है।
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घर पर स्वयं करने हेतु सरल एवं प्रमाणिक विधि
दाहिने हाथ की हथेली में आचमनी से तीन बार जल लेकर "ॐ केशवाय नमः", "ॐ नारायणाय नमः", "ॐ माधवाय नमः" बोलकर पिएं। चौथी बार "ॐ गोविन्दाय नमः" बोलकर हाथ धो लें। इसके बाद अपने नेत्र, नासिका, कान व हृदय का स्पर्श करें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
सरल अर्थ: भगवान पुण्डरीकाक्ष के स्मरण से मनुष्य बाहर और भीतर दोनों से पूर्ण पवित्र हो जाता है।
मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। दीपक को प्रणाम कर हाथ जोड़ें और धूपबत्ती जलाकर प्रभु के सम्मुख 7 बार क्लॉकवाइज घुमाएं।
शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥ दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
सरल अर्थ: कल्याण, आरोग्य और धन-सम्पत्ति देने वाली, अज्ञानता रूपी शत्रु बुद्धि का नाश करने वाली दीप ज्योति को मेरा बारम्बार नमन।
रीढ़ की हड्डी सीधी कर बैठें। दाहिने अंगूठे से दाहिना नथुना बंद कर बाईं नासिका से श्वास भरें (पूरक), भीतर रोकें (कुंभक), और दाहिनी से धीरे-धीरे छोड़ें (रेचक)। श्वास लेते समय मन में गायत्री मंत्र का ध्यान करें।
ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ महः ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यम्। ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
सरल अर्थ: सातों लोकों में व्याप्त परमपिता परमात्मा का हम ध्यान करते हैं, वे हमारी प्राण शक्ति को निर्मल करें।
माला को गोमुखी (या स्वच्छ वस्त्र) से ढककर अनामिका और अंगूठे के सहयोग से मध्यमा उंगली से फेरें। तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) का स्पर्श माला से न होने दें। शांत भाव से गायत्री मंत्र का जप करें।
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
सरल अर्थ: उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा का हम ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे।
प्रातः संध्या में तांबे के लोटे में शुद्ध जल, लाल चन्दन, अक्षत और लाल पुष्प डालकर दोनों हाथों को सिर से ऊपर उठाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। गिरती हुई जलधारा के बीच से सूर्य देव का दर्शन करें।
ॐ एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥ ॐ सूर्याय नमः, ॐ आदित्याय नमः॥
सरल अर्थ: हे सहस्र किरणों वाले, तेज के पुंज, जगत के स्वामी सूर्य नारायण! मुझ भक्त पर अनुकम्पा कर यह अर्घ्य स्वीकार करें।
दोनों हाथ जोड़कर समस्त ब्रह्माण्ड, प्रकृति, जल, वनस्पति और प्राणियों के लिए शांति की प्रार्थना करें। इसके पश्चात तिलक लगाकर अपने दैनिक कार्यों में प्रवृत्त हों।
ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
सरल अर्थ: द्युलोक में शांति हो, अंतरिक्ष में शांति हो, पृथ्वी, जल, औषधियां और वनस्पतियां शांत हों। समस्त विश्व और ब्रह्म में शांति हो। सर्वत्र शांति का वास हो।
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
अर्थ: सृष्टि के रचयिता परमेश्वर का हम ध्यान करते हैं, वे हमारी प्रज्ञा और मेधा को सन्मार्ग पर चलाएं।
लाभ: प्रतिदिन 108 बार जप करने से बुद्धि का विकास, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा में असीम वृद्धि।
आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने। आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते॥
अर्थ: जो व्यक्ति प्रतिदिन सूर्य को नमस्कार और अर्घ्य समर्पित करते हैं, उनकी आयु, बुद्धि, बल, पराक्रम और तेज में निरंतर वृद्धि होती है।
लाभ: आरोग्य, नेत्र ज्योति और आत्म-विश्वास में वृद्धि।
कुल 5 वस्तुएं
काशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन अथवा घर पर आकर शास्त्रसम्मत पूजन संपन्न कराया जाएगा।
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