
“विद्या, बुद्धि, वाणी और संगीत की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती का वंदन”
पीले वस्त्र धारण कर माँ शारदा का श्वेत व पीले पुष्पों से पूजन, बच्चों का अक्षराम्भ (विद्यारम्भ) संस्कार और पुस्तकों का अर्चन।
सृष्टि के निर्माण के समय ब्रह्मा जी के कमंडल जल से वाणी विहीन सृष्टि को स्वर और चेतना प्रदान करने हेतु माँ सरस्वती का वीणा और पुस्तक के साथ प्राकट्य हुआ।
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार श्री कृष्ण ने माँ सरस्वती को वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन जो तुम्हारी आराधना करेगा, वह ज्ञान के सर्वोच्च शिखर को छुएगा।
पीले अथवा श्वेत वस्त्र धारण कर माँ सरस्वती का ध्यान
चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर माँ की प्रतिमा व वाद्य यंत्र/पुस्तकों की स्थापना
चंदन, हल्दी, पीले कनेर/गेंदे के फूल और अक्षत अर्पण
पीले मीठे चावल (केसरिया भात) अथवा बूंदी के लड्डू का भोग
सरस्वती वंदना "या कुन्देन्दुतुषारहारधवला" का सस्वर गायन
पूर्वाह्न काल (प्रातः से दोपहर 12:30 तक) सरस्वती पूजन हेतु सर्वोत्तम है।
आज का पंचांग देखेंकाशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन वीडियो कॉल अथवा संकल्प पूजा का शास्त्रीय प्रबंध।
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