
“धर्म संस्थापनार्थ अवतरित प्रभु श्री रामचन्द्र जी का पावन प्राकट्य दिवस”
अभिजीत मुहूर्त में मध्याह्न 12 बजे प्रभु श्री राम का जन्मोत्सव, रामायण पाठ, पंचामृत अभिषेक और राम स्तुति का पावन पर्व।
अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के गृह में अधर्म के विनाश और सत्य की प्रतिष्ठा हेतु स्वयं श्रीहरि विष्णु ने श्री राम रूप में अवतार लिया था।
वाल्मीकि रामायण के अनुसार जब सूर्य अपने सर्वोच्च स्थान पर था और समस्त शुभ ग्रह अनुकूल थे, तब प्रभु श्री राम का जन्म हुआ। चारों ओर देव दुंदुभियाँ बज उठी थीं।
पालने में बाल रूप श्री राम की प्रतिमा की स्थापना व पंचामृत स्नान
पीले वस्त्र, मुकुट, धनुष-बाण और तुलसी मंजरी का शृंगार
मध्याह्न 12 बजे घंटी-शंख ध्वनि के साथ "भये प्रगट कृपाला" स्तुति
धनिया की पंजीरी, पंचामृत और मिश्री-माखन का भोग
श्री राम रक्षा स्तोत्र व सुंदरकांड का संगीतमय पाठ
मध्याह्न काल (11:00 AM से 01:30 PM के मध्य) में श्री राम जन्म आरती करना शास्त्र सम्मत है।
आज का पंचांग देखेंकाशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन वीडियो कॉल अथवा संकल्प पूजा का शास्त्रीय प्रबंध।
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