
“सोलह कलाओं के पूर्ण अवतार योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण का पावन अवतरण दिवस”
मध्यरात्रि 12 बजे खीरे की नाल काटकर लड्डू गोपाल का प्राकट्य, शंख में पंचामृत भरकर अभिषेक, झूला झुलाना और धनिया पंजीरी भोग।
मथुरा के कारागार में कंस के अत्याचारों से मुक्ति और गीता के अमर संदेश के उद्घोषक भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था।
श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के अनुसार भाद्रपद की अंधेरी रात में कारागार के कपाट स्वतः खुल गए और वसुदेव जी नवजात कृष्ण को यमुना पार गोकुल ले गए।
दिनभर निर्जला या फलाहारी उपवास रखना
सुंदर पालना (झूला) सजाकर उसमें मखमली बिछौना लगाना
खीरे में लड्डू गोपाल को रखकर मध्यरात्रि 12 बजे नाल छेदन की परंपरा
दक्षिणावर्ती शंख से पंचामृत व केसर युक्त दूध से अभिषेक
माखन-मिश्री, धनिया की पंजीरी और 56 भोग अर्पण व आरती
निशीथ काल (रात्रि 11:50 PM से 12:45 AM) में लड्डू गोपाल का प्राकट्य पूजन किया जाता है।
आज का पंचांग देखेंकाशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन वीडियो कॉल अथवा संकल्प पूजा का शास्त्रीय प्रबंध।
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