
“बल, बुद्धि, विद्या और अतुलित बल के धाम श्री पवनपुत्र हनुमान का जन्मदिवस”
चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाना, लाल लंगोट, बूंदी के लड्डू अर्पण और 100 बार हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का सामूहिक पाठ।
माता अंजना और वानरराज केसरी के गृह में भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार के रूप में पवनपुत्र हनुमान जी का अवतरण हुआ।
हनुमान जी के जन्म के समय सूर्य को मीठा फल समझकर वे निगलने दौड़े थे। इंद्र के वज्र प्रहार के बाद समस्त देवताओं ने उन्हें असीम शक्तियों और अमरता का वरदान दिया।
हनुमान जी को गंगाजल से स्नान कराकर चमेली के तेल युक्त सिंदूर का लेपन (चोला)
चांदी का वर्क, लाल मदार के फूलों की माला और तुलसी दल की माला अर्पण
बेसन या बूंदी के लड्डू, गुड़-चना और केले का नैवेद्य
हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ
केसरिया ध्वज की स्थापना
प्रातःकाल पूर्णिमा के पावन मुहूर्त में सिंदूर लेपन व आरती अति मंगलकारी है।
आज का पंचांग देखेंकाशी एवं हरिद्वार के प्रामाणिक वैदिक ब्राह्मणों द्वारा ऑनलाइन वीडियो कॉल अथवा संकल्प पूजा का शास्त्रीय प्रबंध।
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