
“भगवान भुवन भास्कर सूर्य देव एवं छठी मइया की चार दिवसीय महातपस्या”
नहाय-खाय, खरना, अस्ताचलगामी सूर्य को संध्या अर्घ्य और उदीयमान सूर्य को प्रातः अर्घ्य के साथ सम्पन्न होने वाला स्वच्छता और पवित्रता का सर्वोच्च पर्व।
सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं जिनकी ऊर्जा से समस्त चराचर जगत जीवित है। छठी मइया संतानों की रक्षा करने वाली और दीर्घायु प्रदान करने वाली देवी हैं।
श्री राम और माता सीता ने लंका विजय के उपरांत अयोध्या में कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्योपासना की थी। कर्ण भी प्रतिदिन जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे।
प्रथम दिन (नहाय-खाय): गंगा स्नान, लौकी-भात का सात्विक प्रसाद
द्वितीय दिन (खरना): दिनभर निर्जला उपवास, सायंकाल गुड़ की खीर व रोटी
तृतीय दिन (संध्या अर्घ्य): सूप में ठेकुआ, मौसमी फल, गन्ना लेकर नदी तट पर कमर तक जल में खड़े होकर अर्घ्य
चतुर्थ दिन (उषा अर्घ्य): उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे के निर्जला व्रत का पारण
षष्ठी की संध्या को डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य और सप्तमी की भोर में उगते सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया जाता है।
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