
“सनातन नववर्ष (विक्रम संवत्) का शुभारंभ एवं माँ जगदम्बा के नौ स्वरूपों की दिव्य उपासना”
सनातन विक्रम संवत नववर्ष के प्रथम दिन से प्रारंभ होने वाला वासंती नवरात्र, जिसमें माँ शैलपुत्री से माँ सिद्धिदात्री तक नौ देवियों की आराधना कर नवमी तिथि पर भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
ब्रह्म पुराण के अनुसार इसी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्मा जी ने संपूर्ण सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। प्रकृति में नवजीवन, वसंत का उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा के संचय हेतु यह नौ दिवसीय अनुष्ठान अत्यंत कल्याणकारी है।
देवी भागवत पुराण के अनुसार जो साधक चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना कर नियमपूर्वक व्रत और दुर्गा सप्तशती का पाठ करता है, उसके समस्त भौतिक व आध्यात्मिक मनोरथ सिद्ध होते हैं।
जौ बोना, कलश स्थापना और नारियल युक्त कलश का पूजन
अखंड ज्योति की स्थापना और रक्षा सूत्र संकल्प
दैनिक श्री दुर्गा सप्तशती व देवी कवच का पाठ
नवमी तिथि पर हवन एवं नौ कन्याओं का पाद प्रक्षालन व कन्या पूजन
प्रतिपदा तिथि को प्रातःकाल अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना व अखंड ज्योति प्रज्वलन अत्यंत फलदायी है।
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