दैनिक एवं मासिक हवन: घर को तीरथ बनाने की सनातन रीति
ऋग्वेद में कहा गया है कि जहाँ नित्य यज्ञ-हवन होता है, वहाँ बीमारियाँ और नकारात्मक शक्तियां कभी टिक नहीं सकतीं।---
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घर के वास्तु दोष, नकारात्मक ऊर्जा और सूक्ष्म जीवाणुओं के विनाश हेतु पावन देवयज्ञ

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अपार्टमेंट में हवन करते समय समिधा (लकड़ी) कम मात्रा में लें और भीमसेनी कर्पूर व देशी गाय के कंडे (उपले) का प्रयोग करें। गाय के घी और गुग्गल की आहुति देने से सुगंधित भाप बनती है और धुआं बहुत कम निकलता है।
स्वाहा अग्नि देव की पत्नी का नाम है जिनके माध्यम से आहुति देवताओं तक पहुंचती है। "इदं न मम" का अर्थ है कि यह मेरा नहीं है, यह परमात्मा का है—यह मनुष्य के भीतर से अहंकार और लोभ को समाप्त करता है।