महाशिवरात्रि रुद्राभिषेक: मृत्युंजय चेतना का जागरण
शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन जो भक्त केवल एक लोटा गंगाजल और त्रिदल बेलपत्र श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर अर्पित कर देता है, आशुतोष भगवान शिव उसके कोटि जन्मों के पाप क्षमा कर देते हैं।---
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काल के गाल से रक्षा और समस्त पापों के शमन हेतु देवाधिदेव महादेव का पावन अभिषेक अनुष्ठान

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बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग की ओर होना चाहिए और उसका डंठल तोड़ा हुआ होना चाहिए। तीन दलों वाला बिना कटा-फटा बेलपत्र ही स्वीकार्य होता है।
प्रथम प्रहर में कच्चे दूध से, द्वितीय प्रहर में दही से, तृतीय प्रहर में शुद्ध देशी घी से और चतुर्थ प्रहर में शहद व गंगाजल से अभिषेक करने का शास्त्रीय विधान है।
कदापि नहीं। भगवान शिव पर केतकी का फूल और तुलसी दल चढ़ाना शास्त्रों में पूर्णतः वर्जित है। उन्हें धतूरा, भांग, आक और बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं।