पद्म पुराण में कहा गया है कि एकादशी के समान कोई तप नहीं और श्रीहरि जैसा कोई रक्षक नहीं। जानें वर्ष की समस्त 24 एकादशियों के नाम, उनका विशिष्ट फल, व्रत के दिन तुलसी न तोड़ने का नियम और द्वादशी पारण का शास्त्रीय महत्व।
एकादशी व्रत: आत्मा की शुद्धि और भगवान श्रीहरि की परम कृपा
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास में दो एकादशियां आती हैं—एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। पूरे वर्ष के 12 महीनों में कुल 24 एकादशियां होती हैं (अधिकमास होने पर 26 एकादशियां होती हैं)।
व्यास जी के अनुसार जो मनुष्य निष्काम भाव से एकादशी का व्रत रखता है, उसे अश्वमेध यज्ञ से भी कोटि गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है।
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#वर्ष की प्रमुख एकादशियां एवं उनका फल:
1. **उत्पन्ना एकादशी**: एकादशी माता के प्राकट्य का दिन; समस्त पापों का प्रायश्चित।
2. **मोक्षदा एकादशी**: गीता जयंती के दिन आती है; पूर्वजों को मोक्ष प्रदान कराने वाली।
3. **षट्तिला एकादशी**: 6 प्रकार से तिलों का प्रयोग; दुर्भाग्य और दरिद्रता का नाश।
4. **जया एवं विजया एकादशी**: भूत-प्रेत योनि से मुक्ति और युद्ध/विवाद में विजय।
5. **आमलकी एकादशी**: आंवले के वृक्ष का पूजन; दिव्य स्वास्थ्य एवं दीर्घायु।
6. **निर्जला एकादशी (भीमसेनी)**: बिना जल के रखा जाने वाला सबसे कठोर व्रत; सभी 24 एकादशियों का सम्मिलित पुण्य एक ही दिन में।
7. **देवशयनी एकादशी**: चातुर्मास का आरम्भ; भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं।
8. **देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी**: चार माह बाद श्रीहरि का जागरण; तुलसी विवाह एवं समस्त मांगलिक कार्य आरम्भ।
सीधे पूजा आरम्भ करेंएकादशी व्रत एवं पूजन विधि (निर्जला, देवशयनी, देवउठनी आदि समस्त 24 एकादशियाँ)
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